राजबाड़ा का ‘फुटपाथ’ या ‘बाजार’? प्रशासन की कार्रवाई पर ‘खबर पर नजर’ के तीखे सवाल

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🛑 खबर पर नजर: विशेष रिपोर्ट

राजबाड़ा का ‘फुटपाथ’ या ‘बाजार’? प्रशासन की कार्रवाई पर ‘खबर पर नजर’ के तीखे सवाल

इंदौर की धड़कन राजबाड़ा पर अतिक्रमण का ‘ग्रहण’ हटता क्यों नहीं? ‘खबर पर नजर’ ने की ज़मीनी पड़ताल, सामने आई सिस्टम की लाचारी और जनता का आक्रोश।

इंदौर। शहर की हर बड़ी हलचल पर पैनी दृष्टि रखने वाले ‘खबर पर नजर’ ने एक बार फिर राजबाड़ा क्षेत्र का रियलिटी चेक किया है। स्मार्ट सिटी के दावों के बीच राजबाड़ा की असलियत यह है कि यहाँ पैदल चलने वालों के लिए एक इंच जगह नहीं बची है। ‘खबर पर नजर’ की टीम ने पाया कि नगर निगम की रिमूवल गैंग की कार्रवाई महज ‘फोटो सेशन’ बनकर रह गई है।

👁️ ‘खबर पर नजर’ के विशेष बिंदु (Key Highlights):

* 👉 दिखावटी कार्रवाई: ‘खबर पर नजर’ ने देखा कि निगम की गाड़ियां आते ही ठेले गलियों में छुप जाते हैं और गाड़ी जाते ही वापस सड़क पर सज जाते हैं। यह आंख-मिचौली का खेल बरसों से जारी है।

* 👉 राजनीतिक संरक्षण का खेल: क्या अतिक्रमणकारियों के सिर पर रसूखदारों का हाथ है? यह सवाल हम नहीं, ‘खबर पर नजर’ से बातचीत में वहां के रहवासी उठा रहे हैं।

* 👉 जनता बनाम सिस्टम: आम जनता टैक्स देती है सुविधाओं के लिए, लेकिन राजबाड़ा में उसे बदले में मिल रहे हैं—धक्के, जाम और गालियां।

जनता का दर्द, ‘खबर पर नजर’ के साथ

जब ‘खबर पर नजर’ ने स्थानीय नागरिकों से बात की, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा:

* रवि शर्मा ने ‘खबर पर नजर’ को बताया, “प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है। दुकानदारों को पता है कि आज हटेंगे, कल फिर लग जाएंगे। जब तक दुकान सील करने जैसी कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक कुछ नहीं बदलेगा।”

* विजेंद्र सिंह ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा, “कार्रवाई सिर्फ कमजोर पर होती है, जिनकी पहचान ऊपर तक है, उनका सामान सड़क पर ही रहता है। यही भेदभाव व्यवस्था को बिगाड़ रहा है।”

* बुजुर्गों की पीड़ा साझा करते हुए नवीन शर्मा ने कहा, “फुटपाथ पर डिस्प्ले लगे हैं, सड़क पर ई-रिक्शा हैं। हम जाएं तो जाएं कहां? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?”

‘खबर पर नजर’ का सवाल: आखिर कब सुधरेगा राजबाड़ा?

राजबाड़ा कोई प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि इंदौर की शान है। ‘खबर पर नजर’ प्रशासन से सीधा सवाल करता है कि क्या रिमूवल सिर्फ एक रस्म है? अगर नहीं, तो फिर दो दिन बाद वही हालात क्यों बन जाते हैं?

जनता अब भाषण नहीं, समाधान चाहती है। ‘खबर पर नजर’ इस मुद्दे को तब तक उठाता रहेगा, जब तक राजबाड़ा की सांसें अतिक्रमण के बोझ से मुक्त नहीं हो जातीं।

✍️ रिपोर्ट:

शैलेंद्र श्रीमाल

पत्रकार एवं स्टेट प्रेस क्लब सदस्य, म.प्र.

जिला अध्यक्ष, जैन पत्रकार परिषद, इंदौर

🌐 वेबसाइट: www.kpnindia.in

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Author: KPN News

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