44 दिन की संयम साधना के साथ 45 दिवसीय संथारा ने इंदौर ही नहीं अपितु संपूर्ण मध्य प्रदेश में इतिहास रचा
इंदौर | 29 दिसंबर, 2025
इंदौर के धार्मिक जगत में एक ऐतिहासिक और वैराग्यपूर्ण घटना घटी है। शास्त्रज्ञ, आगम ज्ञाता और व्यसन मुक्ति के प्रणेता आचार्य भगवन 1008 श्री रामलाल जी महाराज की आज्ञानुवर्ती संथारा साधिका साध्वी श्री राममधुश्री जी महाराज का 45 दिवसीय संथारा (संलेखना) पूर्ण हुआ। साध्वी जी ने संलेखना पूर्वक देह त्याग कर मोक्ष मार्ग की ओर प्रस्थान किया।
साधना का कठिन मार्ग
साध्वी श्री राममधुश्री जी ने परम पूज्य श्री आदित्य मुनि जी के मुखारविंद से:
* 46 दिन पूर्व उपवास का त्याग किया था।
* 45 दिन पूर्व संथारा ग्रहण किया था।
* 44 दिन पूर्व संयम ग्रहण किया था।
वयोवृद्ध साध्वी पूज्या, धर्मनिष्ठ सुश्रावक श्री राजेश जी कांठेड़ की मातृश्री सुश्राविका मांगीबाई कांठेड़ ने अपने जीवन के अंतिम लक्ष्य को प्राप्त करते हुए समता भाव के साथ इस महान तपस्या को पूर्ण किया।
भक्ति और सेवा का संगम
संथारा की इस अवधि के दौरान इंदौर के समता भवन में विराजित पूज्य साध्वी मंडल ने उनकी धर्म-संयम साधना में पूर्ण सहयोग और भक्ति प्रदान की। श्री साधुमार्गी जैन समता संघ, इंदौर महिला संघ, समता युवा संघ और बहु मंडल आदि ने इन 45 दिनों में अत्यंत विनय भाव से साध्वी जी की सेवा की। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने संथारा साधिका के दर्शन कर धर्म लाभ लिया और उनसे क्षमा याचना की।
अंतिम डोल यात्रा और श्रद्धांजलि
29 दिसंबर को प्रातः 11:30 बजे समता भवन, यशवंत निवास रोड से साध्वी जी की अंतिम डोल यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में हजारों की भीड़ उमड़ी और आकाश ‘जय-जयकार’ के नारों से गूंज उठा।
* अंतिम संस्कार: रामबाग स्थित अंतिम क्रिया स्थल पर साध्वी जी का अंतिम संस्कार किया गया। उनके कांठेड़ परिवार के सदस्यों और श्री संघ के पदाधिकारियों ने उन्हें मुखाग्नि दी।
* श्रद्धांजलि सभा: इस अवसर पर साधुमार्गी जैन संघ, श्वेतांबर जैन महासंघ, जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप फेडरेशन और अखिल भारतीय जैन श्वेतांबर सोशल ग्रुप फेडरेशन की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
* प्रमुख वक्ता: सभा में श्री पिंकेश पगारिया, संतोष मामा, नरेंद्र भंडारी और प्रकाश भटेवरा ने अपने विचार रखे। सभा का संचालन संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री तेजकुमार तांतेड़ ने किया।
आगामी कार्यक्रम
साध्वी जी की स्मृति में गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ, 30 दिसंबर को समता भवन में रखा गया है, जहाँ समाज के लोग उनके त्याग और तपस्या को याद करेंगे।










