Mysore, Karnataka | 27 जून 2024
वर्तमान समय में तकनीक का उपयोग बच्चे और उनके माता-पिता दोनों के जीवन में अहम भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता भी बढ़ती जा रही है। नए शोधों से पता चलता है कि माता-पिता बच्चों के तकनीकी उपकरणों के उपयोग को नियंत्रित करने में जटिलताएं महसूस कर रहे हैं, खासकर तब जब यह बच्चों की नींद, पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों में बाधा डालना शुरू करता है।
राज्य के प्रमुख मानसिक स्वास्थ्य संस्थान निमहंस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज) द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि माता-पिता डिजिटल युग में बच्चों के स्क्रीन व्यवहार को समझने और संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक समय तक मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं।
अध्ययन में यह भी उल्लेखित किया गया है कि जब बच्चों की स्क्रीन टाइम बढ़ जाती है, तब उनकी नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है, जिसका सीधा असर उनके पढ़ाई के प्रदर्शन और दिनचर्या पर पड़ता है। इससे बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी आती है और वे सामाजिक गतिविधियों से दूर हो सकते हैं।
माता-पिता से लिए गए सर्वे में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक ने स्वीकार किया कि वे अपने बच्चों के स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने में असमर्थता महसूस करते हैं, खासतौर पर जब बच्चे स्वतंत्र रूप से तकनीकी उपकरणों का उपयोग करते हैं। एक माता-पिता ने कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे पढ़ाई और अन्य गतिविधियों पर ध्यान दें, लेकिन स्क्रीन के आकर्षण के सामने हमारी बात कम पड़ जाती है।”
निमहंस के मनोवैज्ञानिक डॉ. सीमा रेड्डी के अनुसार, “तकनीकी उपकरणों का संतुलित उपयोग आवश्यक है। माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाएं और स्क्रीन टाइम के नियम बनाएं। जल्दबाजी या सख्ती से हटकर समझदारी और सहयोग की ज़रूरत है।”
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिन में स्क्रीन टाइम को सीमित करना, सोने से पहले ऐसी गतिविधियों से बचना जो आंखों को आघात पहुंचाती हों, और बच्चों को अन्य शारीरिक एवं सामाजिक गतिविधियों में शामिल करना, आवश्यक कदम हैं। साथ ही माता-पिता को अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए, जैसे कि उदासीनता, नींद की कमी या पढ़ाई में गिरावट, ताकि समय रहते उचित मदद मिल सके।
यह स्पष्ट है कि डिजिटल युग में बच्चों का पालन-पोषण करना आज की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया है। माता-पिता, शिक्षकों और विशेषज्ञों के सहयोग से ही बच्चे स्क्रीन टाइम को संतुलित कर स्वस्थ और सफल जीवन की ओर बढ़ सकते हैं।
अतः, स्क्रीन टाइम को लेकर बढ़ती पारिवारिक चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए सही दिशा में कदम उठाना आवश्यक है ताकि भविष्य की पीढ़ी स्वस्थ, सक्रिय और मानसिक रूप से मजबूत बने।
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संवाददाता: खुशी श्रीमाल
मार्गदर्शक: शैलेंद्र श्रीमाल (जिला अध्यक्ष – जैन पत्रकार परिषद, इंदौर)
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