भारतीय माता-पिता क्यों आटिस्टिक वयस्क बच्चों के लिए असिस्टेड लिविंग सुविधाओं की ओर बढ़ रहे हैं?
नई दिल्ली – (रिपोर्टर)
खबर का सार
आटिज़्म से प्रभावित वयस्क बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित भारतीय माता-पिता अब ऐसी असिस्टेड लिविंग सुविधाओं की ओर बढ़ रहे हैं, जहां उनके बच्चे संरक्षित और स्वतंत्र जीवन व्यतीत कर सकें। यह प्रवृत्ति खासकर शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि परिवार आटिस्टिक बच्चों के दीर्घकालिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए सुरक्षित विकल्प तलाश रहे हैं। माता-पिता न केवल किराए पर फ्लैट बुक कर रहे हैं, बल्कि भविष्य के लिए ऐसे केंद्रों का निर्माण भी करवा रहे हैं।
घटना का विस्तार
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय समाज में आटिज़्म से जुड़ी जागरूकता बढ़ी है, जिसके चलते पारंपरिक परिवार मॉडल में बदलाव आ रहा है। पहले जहाँ परिवार आटिस्टिक बच्चों की देखभाल पूरी तरह अपने घरों में करते थे, वहीं अब उनकी बढ़ती उम्र के साथ एक अलग चुनौती आई है। कई माता-पिता ने बताया कि वयस्क बच्चों के लिए घरों में पूरी तरह से समर्पित देखभाल करना सीमित संसाधनों और समय के कारण संभव नहीं हो पा रहा। इस स्थिति ने असिस्टेड लिविंग सुविधाओं को एक व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया है। ये केंद्र न केवल देखभाल बल्कि सामाजिक, व्यावसायिक और दैनिक जीवन कौशल के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं।
प्रतिक्रिया और बयान
संजय वर्मा, एक ऐसा पिता जिनका 24 वर्षीय बेटा आटिस्टिक है, कहते हैं, “हमें यह एहसास हुआ कि हम हमेशा उनके लिए वहाँ नहीं रह पाएंगे। असिस्टेड लिविंग सुविधा उन्हें न केवल सुरक्षा प्रदान करती है, बल्कि उन्हें थोड़ा स्वतंत्र भी बनाती है।” वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय सामाजिक परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव है जो आटिस्टिक व्यक्तियों की गरिमा और स्वावलंबन को बढ़ावा देगा। डॉ. रीना कश्यप, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, बताती हैं, “असिस्टेड लिविंग सेटअप ऐसे वयस्कों को एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है जहां वे सामाजिक संपर्क स्थापित कर सकते हैं और जीवन कौशल सीख सकते हैं।”
अतिरिक्त जानकारी एवं प्रभाव
सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा आटिज़्म के प्रति जागरूकता अभियान और सहायता योजनाएँ भी इस दिशा में योगदान दे रही हैं। कुछ संगठनों ने इस तरह की सुविधाओं के निर्माण में सहयोग देना शुरू किया है। साथ ही, प्राइवेट सेक्टर की कुछ कंपनियाँ भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं, जिससे नए और आधुनिक असिस्टेड लिविंग सेंटर्स खुल रहे हैं। यह प्रवृत्ति न केवल परिवारों की चिंता कम कर रही है, बल्कि आटिस्टिक वयस्क व्यक्तियों के जीवन में भी सुधार ला रही है, जिससे वे अधिक से अधिक समाज का हिस्सा बन पा रहे हैं। कुल मिलाकर, भारत में इस क्षेत्र में सकारात्मक विकास की संभावना मजबूत हो रही है।
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