दर्द कैसे भावनात्मक सुन्नता को बढ़ावा देता है, जो आंत के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है

How pain contributes to emotional numbness, which in turn affects gut health

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

दर्द और भावनात्मक सुन्नता का आंत स्वास्थ्य पर प्रभाव: एक गंभीर समस्या

नई दिल्ली – (रिपोर्टर)

समाचार का सार

आज के दौर में लगातार बने रहने वाले शारीरिक दर्द को केवल एक परेशानी के रूप में ही नहीं देखा जा रहा है, बल्कि यह भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालता है। खासतौर पर क्रॉनिक दर्द जैसे इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), अम्लता और आंत में सूजन जैसी समस्याएं केवल शारीरिक तकलीफ नहीं बढ़ातीं, बल्कि समय के साथ यह दर्द भावनात्मक सुन्नता का कारण बन जाता है। इस सुन्नता का आंत स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे व्यक्ति की जीवन गुणवत्ता प्रभावित होती है।

घटना का विस्तार

पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों ने पाया कि शारीरिक दर्द का लगातार बनी रहने वाली स्थिति मस्तिष्क की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम, अम्लता और पेट की सूजन जैसी समस्याओं में पाचन तंत्र में असहजता रहती है, जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार असुविधा और दर्द शरीर के तनाव हार्मोन को बढ़ाते हैं, जो भावनात्मक भावनाओं को कमज़ोर कर देता है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने इमोशन्स से कट जाता है, जिसके परिणाम स्वरूप भावनात्मक सुन्नता बढ़ती है। यह सुन्नता फिर से आंत के स्वास्थ्य पर असर डालती है, क्योंकि मस्तिष्क और आंत का आपसी संबंध बिगड़ जाता है।

प्रतिक्रिया

डॉ. अंजलि शर्मा, मनोचिकित्सक और गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट कहती हैं, “ऐसे मरीज जो लंबे समय तक क्रॉनिक दर्द से पीड़ित रहते हैं, उनमें भावनात्मक कमजोरी और आत्मसंयम की कमी देखी जाती है। यह न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि पाचन तंत्र की सक्रियता को भी कम करता है। चिकित्सीय दृष्टिकोण से दोनों पहलुओं को समझना और उनका इलाज करना आवश्यक हो जाता है।” उनको यह भी कहना था कि मरीजों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सम्बंधित सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि वे इस समस्यात्मक चक्र से बाहर आ सकें।

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

शोधकर्ताओं का मानना है कि आंत और मस्तिष्क के बीच का संबंध बहुत जटिल है। भावनात्मक सुन्नता के कारण आंत में सूजन और अम्लता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं, जो फिर से दर्द को कई गुना बढ़ाती हैं। इससे जीवन में तनाव का स्तर भी बढ़ता है, जिससे और अधिक नींद की कमी, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं सामने आती हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि ऐसे मरीजों को केवल शारीरिक उपचार नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक सपोर्ट भी दिया जाना चाहिए। आहार संबंधी सुधार, योग, ध्यान एवं सकारात्मक सोच के प्रयास इस चक्र को तोड़ सकते हैं। क्रॉनिक दर्द और भावनात्मक सुन्नता के बीच इस गहरे संबंध को समझना चिकित्सकों, रोगियों और सामान्य जनता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।”

इस प्रकार, लगातार दर्द के कारण होने वाली भावनात्मक सुन्नता को नजरअंदाज करना व्यक्ति के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इसकी समय पर पहचान और उचित उपचार से जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है।

​🚩 सादर जय जिनेंद्र 🚩
​📢 खबर पर नजर (Khabar Par Nazar) न्यूज़ नेटवर्क 📰
🚀 अब आपकी हर खबर पहुंचेगी लाखों लोगों तक!
​🗞️ दैनिक पेपर: दैनिक अभियान आज तक (6 राज्यों में प्रसारित)
🗞️ साप्ताहिक पेपर: जन स्वामी
​🎤 संवाददाता: खुशी श्रीमाल
🛡️ मार्गदर्शक: शैलेंद्र श्रीमाल
(जिला अध्यक्ष – जैन पत्रकार परिषद, इंदौर)
​🌐 वेबसाइट: www.kpnindia.in
​📢 विशेष विज्ञापन: खुशी टेक्नोलॉजी (Khushi Technologies) 📢
🦻 कम सुनना अब कोई समस्या नहीं! आधुनिक तकनीक और स्पष्ट आवाज़ के लिए आज ही अपनाएँ हमारी डिजिटल कान की मशीन।
​🌐 वेबसाइट: www.hearingcareaid.in
📞 संपर्क: 9300041604

Source

KPN News
Author: KPN News

और पढ़ें