ब्रह्मांड पुराण – ब्रह्मांडीय सृष्टि की महान हिंदू धार्मिक ग्रंथ की प्रसिद्धि
स्थान: वाराणसी – (रिपोर्टर)
खबर का सार
भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में पुराणों का विशेष स्थान है। इन पुराणों में से एक ब्रह्मांड पुराण, अपनी विशाल विषयवस्तु और ब्रह्मांड सृष्टि के रहस्यों का वर्णन करने के कारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। लगभग बारह हजार श्लोकों में समाहित यह ग्रंथ हिंदू धर्म के अठारह प्रमुख पुराणों में अंतिम स्थान रखता है। इसे भगवान ब्रह्मा द्वारा रचित माना जाता है, जिसमें सृष्टि के समस्त चक्र और देवताओं की महत्ता विस्तृत रूप से प्रस्तुत है।
घटना का विस्तार
ब्रह्मांड पुराण की विशेषता यह है कि यह न केवल ब्रह्मा द्वारा ब्रह्मांड के सर्जन की कथा कहता है, बल्कि इसमें विभिन्न देवताओं, योग, तापस्यों और धार्मिक विधानों का विस्तृत विवेचन भी शामिल है। संस्कृत शब्द ‘ब्रह्मांड’ दो शब्दों से बने हैं – ‘ब्रह्मा’ जिसका अर्थ है ‘महान्’ या ‘विशाल’ और ‘अंड’ मतलब ‘अंडाकार’ या ‘संसार’। इस प्रकार, ब्रह्मांड पुराण का शाब्दिक अर्थ है ‘ब्रह्मा का अण्डाकार विश्व’ या ‘ब्रह्मांड का विवरण।’ इसके अलावा यह ग्रंथ धर्म, नीति एवं भक्ति मार्ग के अनुपम सिद्धांतों का भी अध्ययन कराता है। इसकी संपूर्ण रचना हिंदू दर्शन की गूढ़ता और व्यापकता का परिचायक है।
संबंधित बयान/प्रतिक्रिया
धार्मिक विद्वान पंडित रामकृष्ण शर्मा ने कहा, “ब्रह्मांड पुराण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति और जीवन के गूढ़ पहलुओं का विज्ञान और दर्शन दोनों का संगम है। इसका अध्ययन करने से न केवल धार्मिक श्रद्धा पुष्ट होती है, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता भी गहरा होती है।” वहीं एक पुरातत्व विज्ञानी डॉ. अनिता वर्मा ने कहा कि पुराणों की भाषा और शैली का अध्ययन भारतीय सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और ब्रह्मांड पुराण उसका बड़ा उदाहरण है।
अतिरिक्त जानकारी या प्रभाव
ब्रह्मांड पुराण का महत्व आज भी प्रासंगिक है क्योंकि आधुनिक विज्ञान और प्राचीन धर्म के बीच एक सेतु का काम करता है। कई विश्वविद्यालयों में इसे धर्मशास्त्र और भारतीय दर्शन के अंतर्गत पढ़ाया जाता है। इसके विभिन्न संक्षिप्त संस्करण भी उपलब्ध हैं, जिन्होंने इसे सामान्य जन तक पहुंचाने में मदद की है। विभिन्न तीर्थस्थलों पर इसके अनुष्ठानिक पाठ से भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त होता है। अतः यह ग्रंथ केवल धार्मिक संदर्भ में ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
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