स्वास्थ मंत्रालय ने टीकों, एंटीमाइक्रोबियल और कैंसर दवाओं के लिए क्यूआर कोड आधारित दवा ट्रेसबिलिटी का विस्तार किया

Health Ministry expands QR code-based drug traceability to vaccines, antimicrobials, and cancer medicines

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीकों, एंटीमाइक्रोबियल और कैंसर दवाओं के लिए क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी लागू की

नई दिल्ली – (रिपोर्टर)

खबर का सार

भारत सरकार ने औषधि नियमों में संशोधन करते हुए अब टीकों, एंटी-कैंसर दवाओं, एंटीमाइक्रोबियल और मादक द्रव्यों के अंतर्गत आने वाली दवाओं को भी अनुसूची H2 में शामिल कर क्यूआर कोड आधारित ट्रेसबिलिटी प्रणाली का विस्तार किया है। इस नई पहल का उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और ट्रेसबिलिटी को बढ़ाना है ताकि चिकित्सा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यह प्रणाली जुलाई 2027 से चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

घटना का विस्तार

स्वास्थ्य मंत्रालय ने संशोधित ड्रग्स रूल्स के तहत टीकों, एंटीमाइक्रोबियल दवाओं, कैंसर उपचार में प्रयुक्त दवाओं और नारकोटिक ड्रग्स की दवाओं को अनुसूची H2 में जोड़ दिया है, जिससे अब इन दवाओं पर भी क्यूआर कोड आधारित निगरानी और ट्रेसबिलिटी अनिवार्य होगी। क्यूआर कोड की मदद से प्रत्येक दवा की निर्मित, वितरण और बिक्री प्रक्रिया की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में रिकॉर्ड की जाएगी। यह तकनीक नकली दवाओं के खिलाफ एक सशक्त उपाय के रूप में सामने आ रही है, जिससे मरीजों को प्रभावशाली और सुरक्षित दवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। जुलाई 2027 से इसका चरणबद्ध कार्यान्वयन शुरू होगा, जिसमें दवा निर्माताओं, वितरकों और फार्मेसियों के लिए नए मानक बनाए जाएंगे।

सरकारी बयान एवं प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह कदम भारतीय दवा बाजार में गुणवत्ता नियंत्रण को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। टीकों और कैंसर दवाओं जैसी महत्वपूर्ण दवाओं पर यह निगरानी आवश्यक है ताकि मरीजों को बेहतरीन चिकित्सा सेवा मिले।” विशेषज्ञों ने इसे एक स्वागत योग्य निर्णय बताया है, जो दवा सुरक्षा और निगरानी प्रणाली को आधुनिक तकनीक से जोड़ता है। फार्मा उद्योग ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा है कि इससे उनकी पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा।

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

स्वास्थ्य मंत्रालय की इस नई नियमावली के तहत, फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने उत्पादों के पैकेजिंग पर क्यूआर कोड प्रदर्शित करें, जिसके माध्यम से दवा की प्रामाणिकता की जांच की जा सकेगी। इससे न केवल नकली दवाओं का कारोबार कम होगा, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला की पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। चिकित्सकों और उपभोक्ताओं को दवा के सही स्रोत और विवरण की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सकेगी। यह पहल भारत को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी बनाएगी और स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगी।

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KPN News
Author: KPN News

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