नई दिल्ली, दिल्ली। प्याज की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को आने वाले दिनों में राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। गर्मी के मौसम में खरीदे गए प्याज के बफर स्टॉक का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सड़ने और अंकुरित होने के कारण खराब हो चुका है। वहीं, खरीफ फसल में देरी से सितंबर और अक्टूबर के दौरान प्याज की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ शुरू की है। करीब 500 टन प्याज लेकर विशेष ट्रेन लासलगांव से दिल्ली के लिए रवाना हुई। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ग्रेडिंग और सॉर्टिंग में देरी के कारण ट्रेन लगभग 24 घंटे देर से रवाना हुई, लेकिन इसके करीब एक दिन में दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है।
नाफेड के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, प्याज के खराब होने की बड़ी वजह कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश है। बारिश के कारण प्याज की गुणवत्ता प्रभावित हुई और उसकी शेल्फ-लाइफ कम हो गई। इससे लंबे समय तक भंडारण करना मुश्किल हो गया है। सामान्य परिस्थितियों में हर साल करीब 20 प्रतिशत प्याज खराब होता है, लेकिन इस बार नुकसान का स्तर अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है।
कई शहरों में प्याज की खुदरा कीमतें 50 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने के बाद केंद्र सरकार ने बाजार में हस्तक्षेप तेज किया है। दिल्ली के लिए रेल के अलावा सड़क मार्ग से भी प्याज भेजा जा रहा है। नाफेड और एनसीसीएफ की ओर से ट्रकों के जरिए भी प्याज की खेप भेजी गई है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार, कांदा एक्सप्रेस से आने वाले प्याज को दिल्ली में नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के माध्यम से 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराया जाएगा। भविष्य में अन्य बड़े शहरों तक भी रेल से प्याज भेजने की योजना है।
सरकार ने गर्मी के मौसम में 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन नाफेड और एनसीसीएफ मिलकर केवल करीब 1.20 लाख टन ही खरीद सके। दूसरी तरफ किसानों के पास रखा पुराना प्याज भी तेजी से कम हो रहा है।
खरीफ प्याज की बुवाई में देरी से चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों के अनुसार, नया प्याज नवंबर के मध्य तक बाजार में पहुंच सकता है और नियमित आवक दिसंबर से शुरू होने की संभावना है। यदि मौजूदा स्टॉक इसी तरह खराब होता रहा, तो अक्टूबर के दौरान प्याज की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।









