हल्द्वानी, उत्तराखंड
हल्द्वानी में राहुल गांधी की रैली के बाद कथित तौर पर कार्यक्रम स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस ने FIR की कार्रवाई को लेकर भाजपा और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि भाजपा ने राहुल गांधी पर राजनीतिक लाभ के लिए मामले को तूल देने का आरोप लगाया है।
रैली के बाद शुरू हुआ विवाद
मामला राहुल गांधी की हल्द्वानी रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ से जुड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि रैली के बाद इस तरह की कार्रवाई सामाजिक भेदभाव और जातिगत मानसिकता को दर्शाती है। पार्टी ने इस मामले को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी ने भी इस मामले में कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज होने पर कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। कांग्रेस का कहना है कि कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना अपराध नहीं हो सकता।
सचिन पायलट ने सरकार से मांगा जवाब
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति के साथ अन्याय या भेदभाव हुआ है और वह न्याय की मांग करता है, तो क्या न्याय मांगना अपराध है? उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर सरकार और भाजपा से जवाब मांगा।
कांग्रेस नेताओं ने FIR की कार्रवाई को राजनीतिक दबाव और जातिगत पूर्वाग्रह से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच होनी चाहिए।
भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार किया
भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी पर राजनीतिक फायदे के लिए विवाद को हवा देने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक रंग दे रही है।
भाजपा की ओर से यह भी दावा किया गया कि राहुल गांधी इस मुद्दे को ऐसे समय उठा रहे हैं जब कांग्रेस के भीतर भी राजनीतिक परिस्थितियां चर्चा में हैं।
फिलहाल हल्द्वानी का विवाद FIR से आगे बढ़कर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। कानूनी प्रक्रिया के साथ दोनों दलों की बयानबाजी भी जारी रहने के आसार हैं।









