इजराइल में 27 अक्टूबर को संसदीय चुनाव हो रहे हैं, जो देश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। यह चुनाव केवल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता को लेकर नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया के राजनीतिक समीकरण इस पर निर्भर हैं। ट्रंप समेत कई वैश्विक नेता इस चुनाव को बड़े तनाव के साथ देख रहे हैं।
नेतन्याहू की चुनौतियाँ और ट्रंप की बेचैनी
नेतन्याहू इजराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेता हैं और इस बार उनकी सत्ता पर बड़ी चुनौती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलकर नेतन्याहू का समर्थन किया है, क्योंकि वे चाहते हैं कि इजराइल में ऐसी सरकार बनी रहे जो उनकी विदेश नीति को आगे बढ़ाए। ट्रंप के अनुसार, यह चुनाव अमेरिकी विदेश नीति की सफलता के लिए जरूरी है।
नेतन्याहू ने भी अपने चुनाव प्रचार में कहा है कि वोटर अपनी जिम्मेदारी समझें और उनकी सरकार को बनाए रखें। उन्होंने चुनावी माहौल को नाजुक बताया और कहा कि ईरान के खिलाफ लड़ाई में जीत रिकॉर्ड की जाएगी। इसके बाद इजराइल की सुरक्षा और समृद्धि स्थायी होगी।
राजनीतिक तनाव और युद्ध की आशंका
विपक्षी नेता गादी आइज़ेनकोट ने कहा है कि नेतन्याहू को सत्ता से हटाया जाना चाहिए क्योंकि वे इजराइल को एक अस्थिर अंतरिम सरकार में फंसाना चाहते हैं। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस चुनाव को निरर्थक करार दिया है और कहा है कि इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं आएगा।
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले और उसके बाद के युद्ध के बाद पहला है, इसलिए क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। नेतन्याहू को इस बात का डर भी है कि तेहरान चुनाव में हस्तक्षेप कर सकता है। दूसरी ओर, IDF चीफ एयाल जमीर ने नेतन्याहू को ईरान पर हमले के लिए लिखित आदेश की मांग की है। यह चुनाव युद्ध जैसे माहौल में हो रहा है।
इजराइल के कई कानूनी मामलों का भी नेतन्याहू पर असर पड़ सकता है, अगर वे चुनाव हार जाते हैं। इससे उनकी राजनीतिक पिचिदगियां और बढ़ जाएंगी। साथ ही,美国 के गाजा क्षेत्र में निवेश और योजनाएं भी संकट में आ सकती हैं।
ट्रंप ने मतदान से पहले मतदाताओं से अपील की है कि वे नेतन्याहू को वोट दें, क्योंकि वे एक मजबूत ‘वॉरियर प्रधानमंत्री’ हैं। ऐसी स्थिति में इजराइल और अमेरिका दोनों की सुरक्षा रणनीतियों पर असर पड़ेगा।
इस चुनाव में नेतन्याहू की जीत या हार पश्चिम एशिया के भू-राजनीति पर गहरा प्रभाव डालेगी। ट्रंप और नेतन्याहू दोनों के लिए यह चुनाव राजनीतिक भविष्य का एक बड़ा परीक्षण है। इजराइल की जनता ही तय करेगी कि अगले वर्षों में देश किस दिशा में जाएगा।
संक्षेप में, 27 अक्टूबर का इजराइल चुनाव केवल एक देश का चुनाव नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के गणित को बदलने वाला मोड़ साबित होगा। मतदान के बाद ही पता चलेगा कि इजराइल और उसके सहयोगियों की रणनीति कितनी सफल होती है।









