न्यूयॉर्क, न्यूयॉर्क – जेफरी एपस्टीन द्वारा यौन शोषण का शिकार हुई महिलाओं के हित में एक महत्वपूर्ण न्यायिक कदम उठाया गया है। एपस्टीन के विरुद्ध मुकदमेबाजी में महिलाओं की ओर से दायर एक याचिका में बैंक ऑफ अमेरिका पर आरोप लगाया गया था कि उसने एपस्टीन के संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की अनदेखी की, जबकि वह 2008 से 2019 तक लड़कियों और महिलाओं के यौन शोषण में लिप्त था।
वकीलों का कहना है कि बैंक ऑफ अमेरिका ने ऐसे लेन-देन को नजरअंदाज कर अपराध के वित्तपोषण में अप्रत्यक्ष रूप से सहायता की। ये लेन-देन 2008 के जून महीने से शुरू होकर जुलाई 2019 में एपस्टीन की गिरफ्तारी तक जारी रहे। पूर्व संघीय अभियोजक और पीड़ितों के वकीलों ने इस मामले की बड़ी साजिश उजागर करने का दावा किया है।
मामले की जांच के दौरान यह सामने आया कि कई महिलाओं ने एपस्टीन से यौन उत्पीड़न की शिकायतें की थीं, लेकिन वित्तीय संस्थानों की भूमिका पर उचित कार्रवाई नहीं हुई। वकीलों ने दावा किया कि बैंक की लापरवाही और वित्तीय लेन-देन की जांच नहीं करने से अपार हानि हुई, जिससे पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देर हुई।
यह मामला एक लंबे समय से चर्चित था, जिसमें बैंक ऑफ अमेरिका ने विवाद को सुलझाने के लिए एक समझौता प्रस्तावित किया है। वकीलों के अनुसार, इस समझौते से लगभग 75 से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो सकेंगी, जिनका सीधे तौर पर एपस्टीन की क्रूरता का सामना करना पड़ा।
कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह समझौता अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए एक चेतावनी संदेश साबित हो सकता है। इससे यह साफ हो गया है कि वित्तीय संस्थानों को संदिग्ध लेन-देन की गंभीरता से जांच करनी होगी, खासकर जब वह किसी गंभीर अपराध से जुड़ा हो।
पीड़ित महिलाओं के वकीलों ने उम्मीद जताई है कि इस समझौते से न्याय के मार्ग में आने वाली बाधाएं कम होंगी और अन्य कमज़ोर वर्गों को भी न्याय मिल सकेगा। इस प्रकार का न्यायिक दबाव समाज में ऐसी घटनाओं को रोकने में मददगार हो सकता है।
बैंक ऑफ अमेरिका ने अभी तक इस समझौते पर अपने आधिकारिक बयान नहीं दिए हैं। वहीं, न्यायालय अगले सप्ताह इस मामले पर सुनवाई करेगा और अंतिम निर्णय लेने की संभावना जताई जा रही है।
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