चेन्नई में क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया ने वार्षिक टेक्सटाइल प्रदर्शनी में साड़ी और विविध वस्त्रों का आयोजन किया

In Chennai, Crafts Council of India celebrates the sari and more, at their annual textile showcase

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क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया की वार्षिक टेक्सटाइल शो ‘तारी’ का आकर्षक आयोजन

चेन्नई – (रिपोर्टर)

खबर का सार

चेन्नई में 10 और 11 अप्रैल को आयोजित होने वाली क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया की वार्षिक टेक्सटाइल प्रदर्शनी ‘तारी — द लूम’ एक सांस्कृतिक और कलात्मक महोत्सव के रूप में उभरी है। इस प्रदर्शनी में देश के 31 डिज़ाइनरों और बुनकरों द्वारा बनाई गई साड़ियों समेत विभिन्न पारंपरिक और समकालीन वस्त्र प्रदर्शित किए जाएंगे। यह आयोजन न केवल भारतीय वस्त्र उद्योग की विविधता को समर्पित है, बल्कि हथकरघा कला को भी वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है।

घटना का विस्तार

‘तारी — द लूम’ कार्यक्रम में शामिल डिज़ाइनर और कारीगर भारत के विभिन्न हिस्सों से आए हैं, जिनका उद्देश्य हथकरघा की कला को पुनर्जीवित करना और उसे नयी पीढ़ी तक पहुँचाना है। इसमें बंगाल की टांका साड़ी, तमिलनाडु की कांचीपुरम साड़ियाँ, असम की मोकशा सिल्क समेत अन्य पारंपरिक वस्त्र शामिल हैं। इस दो दिवसीय मेले में डिज़ाइन और निर्माण की प्रक्रिया को भी दर्शाया जाएगा, जिससे दर्शकों को वस्त्रों के पीछे की कहानी जानने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम स्थल पर लाइव डेमो, कार्यशालाएं और चर्चा सत्र भी आयोजित किये जायेंगे।

संबंधित बयान/प्रतिक्रिया

क्राफ्ट्स काउंसिल ऑफ इंडिया के संयोजक ने कहा, “‘तारी’ हमारे सांस्कृतिक धरोहर और कारीगरों के हुनर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने का एक महत्वपूर्ण मंच है। हमें गर्व है कि हम ऐसी विविधता वाली साड़ियाँ और हथकरघा वस्त्र प्रस्तुत कर रहे हैं जो हमारे पारंपरिक कला रूपों को जीवित रखते हैं।” एक प्रमुख डिज़ाइनर ने भी कहा, “यह प्रदर्शनी हमें हमारे स्थानीय कारीगरों के साथ पुनः जुड़ने और उनके हुनर को नए रूप में प्रदर्शित करने का अवसर देती है।”

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

इस प्रदर्शनी से न केवल कला एवं फैशन जगत को लाभ होगा, बल्कि कारीगरों को आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलती है। मंच पर प्रदर्शित वस्त्रों की खरीदारी भी की जा सकेगी, जिससे हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ‘तारी’ जैसी पहलें भारतीय हथकरघा एवं वस्त्र उद्योग को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक होती हैं और युवाओं को भारतीय हस्तशिल्प में करियर चुनने के लिए प्रेरित करती हैं। अंततः, चेन्नई में यह आयोजन भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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Author: KPN News

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