स्कूल शासन को विकेंद्रीकृत करने के प्रयास में केंद्र ने स्थानीय समितियों को अधिकार और आदेशित किया

In bid to decentralise school governance, Centre mandates, empowers local committees

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केंद्र की नई नीति से स्कूल प्रबंधन में बदलाव: सेकेंडरी स्कूलों में एसएमसी का दायरा बढ़ा

स्थान: नई दिल्ली – (रिपोर्टर)

समाचार सारांश

केंद्र सरकार ने स्कूलों के प्रशासन में पारदर्शिता और सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से नई दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब से माध्यमिक स्कूलों में भी स्कूल मैनेजमेंट कमिटी (SMC) का दायरा लागू होगा। इन कमेटियों में 75 प्रतिशत सदस्य अभिभावक होंगे, जिनमें से कम से कम 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी। साथ ही, एसएमसी को ₹30 लाख तक की स्कूल निर्माण एवं मरम्मत की कार्यवाही खुद कराने, बजट की समीक्षा करने और प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM-POSHAN) की निगरानी करने का अधिकार भी दिया गया है।

नियमों का विस्तार

केंद्र सरकार द्वारा जारी नए मानदंडों के अनुसार, एसएमसी का दायरा अब केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। माध्यमिक विद्यालयों में भी यह प्रक्रिया लागू होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर स्कूलों के विकास और प्रबंधन में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ेगी। इन समितियों के सदस्यों में तिरसठ प्रतिशत से अधिक अभिभावक होंगे, जिनमें महिलाएं कम से कम نصف भागीदारी रखेंगी। इससे महिलाओं की विद्यालय प्रबंधन में सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाएगी।

प्रतिक्रिया और दृष्टिकोण

शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी मजबूत होगी। एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी ने बताया, “यह व्यवस्था स्कूलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाएगी, जिससे योजनाओं का बेहतर कार्यान्वयन संभव होगा।” वहीं, कुछ अभिभावक इस बदलाव को सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं जो उनकी जिम्मेदारी और अधिकारों को बढ़ाएगा।

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

एसएमसी को अब स्कूलों के नागरिक निर्माण कार्यों की देखरेख करने का अधिकार भी दिया गया है, जिनकी लागत ₹30 लाख तक हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर मरम्मत और विकास के काम शीघ्र और पारदर्शी ढंग से संपन्न होंगे। साथ ही बजट की समीक्षा और प्रधानमंत्री पोषण योजना की निगरानी करने के दायित्व के कारण छात्रों को बेहतर पोषण व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। इस नई व्यवस्था के लागू होने से छात्र हितों की रक्षा करते हुए गुणवत्ता शिक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता बनी रहेगी।

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KPN News
Author: KPN News

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