हुड्डा ने मोदी सरकार के 12 वर्षों पर उठाए सवाल, बेरोजगारी और महंगाई को बताया बढ़ता संकट

मोदी सरकार के 12 साल पर हुड्डा ने उठाए सवाल, कहा- बेरोजगारी और महंगाई बढ़ी

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हुड्डा ने मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर उठाए महत्वपूर्ण सवाल

चंडीगढ़ – (रिपोर्टर)

समाचार का सारांश

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल पर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और विकास की कमी को लेकर सरकार की आलोचना की। यह बयान राज्य में हो रही विभिन्न चुनौतियों के बीच आया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को गति दी है।

कार्यकाल की विस्तार से समीक्षा

हुड्डा ने कहा कि मोदी सरकार का 12 साल का कार्यकाल संसदीय हिसाब से बड़ा माना जाता है, लेकिन इस अवधि में अपेक्षित विकास नहीं हुआ। हरियाणा में भी भाजपा लगभग 12 वर्ष से सत्ता में है, बावजूद इसके यहां मूलभूत विकास कार्य, जैसे बड़ी मेट्रो या रेलवे परियोजनाओं की कमी साफ देखी जा रही है। बिजली उत्पादन में भी कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई है और प्रदेश में उच्च शिक्षा के लिए बड़ी संस्थाओं या विश्वविद्यालयों की स्थापना नहीं हुई, जो युवाओं के बेहतर अवसरों में बाधक है।

सरकार की आलोचना और किसान, बेरोजगारी मुद्दे

यहां तक कि किसान अहम समस्या बने हुए हैं। हुड्डा ने बताया कि खेती की लागत बढ़ रही है, लेकिन किसानों की आमदनी घट रही है। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य के क्रियान्वयन में हो रही कमजोरियों की ओर भी इशारा किया। इसके अतिरिक्त, बेरोजगारी की दर बढ़ने और युवा वर्ग रोजगार के लिए संघर्ष करने को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लोग अब खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते, जिससे कानून-व्यवस्था के हालात पर प्रश्न उठते हैं।

आग की घटना और प्रभावित परिवारों की माँगें

हुड्डा ने रोहतक के बाजार में लगी आग की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हुई और कई दुकानें जलकर राख हो गईं, जिससे कई परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई। उन्होंने सरकार से पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने और राहत पैकेज बढ़ाने की मांग की। खासकर जिन परिवारों ने अपने सदस्य खोए हैं, उन्हें मुआवजा देने और एक सरकारी नौकरी की पेशकश करने पर जोर दिया। साथ ही व्यापारियों के आर्थिक नुकसान की भरपाई करने की भी आवश्यकता बताई।

राजनीतिक बयान और निष्कर्ष

हुड्डा ने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संबंधों पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए इसे दोनों के बीच की बातचीत बताया और इस पर विस्तार से कुछ कहने से बचा। उन्होंने दल-बदल की राजनीति पर कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पार्टी बदलना चाहता है तो उसे पहले इस्तीफा देकर जनता का नया जनादेश लेना चाहिए। उन्होंने लोकतंत्र में मतदाता का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण बताया और जनप्रतिनिधियों से इसे सम्मानित करने की अपील की। यह बयान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में व्यापक प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।

इस प्रकार, हुड्डा ने न केवल मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल की समीक्षा की बल्कि हरियाणा में भाजपा सरकार की सरकार की नीतियों व विकास की कमी पर भी स्पष्ट सवाल खड़े किए हैं। उनकी बातें राज्य और केंद्र सरकार के सामने कई चुनौतियों को उजागर करती हैं, जिन पर आगामी समय में चर्चा और कार्रवाई संभावित है।

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