टचस्क्रीन का बढ़ता शौक बन सकता है जानलेवा, मोबाइल से भी ज्यादा खतरनाक है कार का नया सिस्टम

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टचस्क्रीन का बढ़ता शौक बन सकता है जानलेवा, मोबाइल से भी ज्यादा खतरनाक है कार का नया सिस्टम

लंदन/इंदौर। आधुनिक कारों में लक्जरी और स्टाइल के नाम पर दी जा रही बड़ी टचस्क्रीन अब ड्राइवरों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनकर उभर रही है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की कार सेफ्टी एजेंसियों द्वारा किए गए एक चौंकाने वाले खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि ड्राइविंग के दौरान इन स्क्रीन का इस्तेमाल मोबाइल फोन से भी अधिक जोखिम भरा है. सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि टचस्क्रीन के कारण ड्राइवर का रिएक्शन टाइम 50 प्रतिशत तक धीमा हो जाता है, जिसका अर्थ है कि अचानक सामने आई मुसीबत के वक्त ड्राइवर समय पर ब्रेक लगाने की फुर्ती खो देता है.
अध्ययन के अनुसार, टचस्क्रीन की सबसे बड़ी खामी यह है कि यह ‘मसल मेमोरी’ को सक्रिय नहीं होने देती. जहां पुराने फिजिकल बटन और नॉब्स को ड्राइवर बिना सड़क से नजर हटाए इस्तेमाल कर सकता था, वहीं टचस्क्रीन के मेनू में उलझने के लिए उसे बार-बार सड़क से ध्यान हटाकर स्क्रीन पर देखना पड़ता है. ब्रिटेन की ट्रांसपोर्ट रिसर्च लैब और मेलबर्न यूनिवर्सिटी की स्टडी में पाया गया कि मोबाइल पर टाइप करने से रिएक्शन 35 प्रतिशत और फोन पर बात करने से 46 प्रतिशत धीमा होता है, लेकिन टचस्क्रीन इसे 50 प्रतिशत तक धीमा कर देती है. इसी खतरे को देखते हुए अब विदेशी सुरक्षा एजेंसियों ने कार कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि इस साल से कारों में जरूरी फीचर्स के लिए फिर से फिजिकल बटन देना अनिवार्य होगा ताकि ड्राइविंग के दौरान होने वाले भटकाव को कम किया जा सके.
वेबसाइट: KPNindia.in
पत्रकार: शैलेंद्र श्रीमाल

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