इंदौर में रातोंरात बोरिंग का खेल जारी, मंत्री विजयवर्गीय का आदेश हो रहा छलनी

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भागीरथपुरा कांड के बाद भी इंदौर में रातोंरात बोरिंग का खेल जारी, मंत्री विजयवर्गीय का आदेश हो रहा छलनी
इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई दुखद मौतों के बाद शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे। लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद इंदौर के कई इलाकों में रातोंरात बोरिंग कर भूजल का दोहन करने का अवैध खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
खबर पर नजर परिवार की पड़ताल में सामने आया है कि नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मीडिया के माध्यम से दिए गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, शहर के बायपास क्षेत्र और नई बसावटों में बोरिंग मशीनों की आवाजें रात के सन्नाटे में लगातार सुनाई दे रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मंत्री जी का मौखिक आदेश जमीन पर आते-आते अपनी ताकत खो रहा है।
रात के अंधेरे में ‘पाताल’ चीरने की तैयारी
शहर के बायपास से सटी कॉलोनियों, लसूड़िया और आसपास के क्षेत्रों में प्लॉट मालिकों द्वारा जरूरत से अधिक बोरिंग कराई जा रही है। खबर पर नजर को स्थानीय रहवासियों ने बताया कि रात 11 बजे के बाद अचानक मशीनें कॉलोनियों में दाखिल होती हैं और सुबह होने से पहले ही जमीन में गहरे छेद कर दिए जाते हैं। इससे न केवल लोगों की नींद प्रभावित हो रही है, बल्कि भविष्य में जलसंकट की आशंका भी गहरा गई है। जानकारों का कहना है कि एक ही सीमित क्षेत्र में कई बोरिंग होने से भूजल स्तर खतरनाक स्तर तक नीचे गिर सकता है।
सिस्टम की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल
रहवासियों का आरोप है कि रात में होने वाला यह बोरिंग सिस्टम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली का खुलासा करता है। मंत्री के सख्त रुख के बावजूद विभागीय अधिकारियों और स्थानीय स्तर पर निगरानी के संबंध में कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। लोगों का मानना है कि जहाँ नियमानुसार अनुमति मिलने में महीनों लग जाते हैं, वहीं ‘मैनेजमेंट’ के माध्यम से रातोंरात रास्ता निकालकर चोरी-छिपे काम पूरा कर लिया जाता है।
2019 का सख्त आदेश भी पड़ा ठंडा
गौरतलब है कि जलसंकट और अनियंत्रित बोरिंग को रोकने के लिए वर्ष 2019 में प्रशासन द्वारा एक बेहद सख्त और व्यवस्थित आदेश जारी किया गया था। खबर पर नजर परिवार आपको याद दिला दे कि उस समय भूजल स्तर को गिरते देख यह प्रावधान किया गया था कि कोई भी व्यक्ति या संस्था बोरिंग करना चाहे, तो उसे आसपास रहने वाले करीब 40 लोगों की सहमति लेना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य स्थानीय जरूरतों और जल स्तर के संतुलन को बनाए रखना था।
मंत्री विजयवर्गीय की मंशा की अनदेखी
भागीरथपुरा की घटना के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया के माध्यम से स्पष्ट किया था कि फिलहाल शहर में नई बोरिंग न कराई जाएं। दूषित पानी और अव्यवस्था के कारण शहर पहले ही भारी कीमत चुका चुका है। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट है। मंत्री के मौखिक आदेश को नगर निगम और पुलिस विभाग प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम दिख रहे हैं, जिसके चलते बोरिंग माफिया के हौसले बुलंद हैं।
खबर पर नजर के माध्यम से जनता और प्रशासन से यह अपील की जाती है कि समय रहते इन गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि आने वाली गर्मियों में इंदौर को किसी भीषण जलसंकट का सामना न करना पड़े।
खबर पर नजर परिवार के लिए,
खुशी श्रीमाल

KPN News
Author: KPN News

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