प्रशासन से अपील: ‘प्रेस’ की आड़ में फर्जीवाड़े पर लगे लगाम, वाहनों की हो सघन चेकिंग
इंदौर | खबर पर नजर (KPN News) शैलेंद्र श्रीमाल, पत्रकार
शहर में पत्रकारिता की आड़ में अपना निजी स्वार्थ सिद्ध करने वाले ‘फर्जी पत्रकारों’ का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। आलम यह है कि हर दूसरी-तीसरी गाड़ी पर ‘प्रेस’ (PRESS) लिखा हुआ स्टीकर लगाकर लोग सड़कों पर रौब झाड़ रहे हैं और नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर अब प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
क्या है पूरा मामला?
हाल ही में इंदौर कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई के दौरान एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहाँ एक व्यक्ति खुद को मीडियाकर्मी बताकर अधिकारियों और वहां मौजूद लोगों पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। जब सजग मीडिया साथियों ने उससे उसके संस्थान का नाम और परिचय पत्र (ID Card) मांगा, तो वह संतोषजनक जवाब देने के बजाय विवाद करने लगा और बाद में वहां से भाग खड़ा हुआ। जांच में पाया गया कि उसकी गाड़ी पर ‘MPP न्यूज़’ का स्टीकर लगा था, लेकिन वह किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से नहीं जुड़ा था।
प्रशासन और पुलिस से मुख्य मांगें:
पत्रकारिता जगत की छवि को बचाने के लिए प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
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विशेष चेकिंग अभियान: जिस तरह हेलमेट और सीटबेल्ट के लिए अभियान चलाया जाता है, उसी तरह ‘प्रेस’ लिखे वाहनों की पात्रता की जांच के लिए विशेष नाकेबंदी की जाए।
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दस्तावेजों का सत्यापन: प्रेस लिखे वाहन चालकों से उनके संस्थान का नियुक्ति पत्र और वैध परिचय पत्र अनिवार्य रूप से मांगा जाए।
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फर्जी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई: यदि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से प्रेस का बोर्ड लगाकर घूमता पाया जाए, तो उस पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो और उसका ड्राइविंग लाइसेंस तुरंत निरस्त किया जाए।
आम जनता और अधिकारियों के लिए संदेश
यदि कोई व्यक्ति खुद को पत्रकार बताकर आपको डराता-धमकाता है या अवैध वसूली का प्रयास करता है, तो तुरंत उसका परिचय पत्र देखें। संदेह होने पर संबंधित कार्यालय में फोन लगाकर पुष्टि करें और गलत पाए जाने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
“पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। चंद फर्जी लोगों की वजह से पूरे पेशे की गरिमा और विश्वसनीयता दांव पर लगी है। प्रशासन को इस पर अविलंब कड़ा एक्शन लेना चाहिए।”
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प्रस्तुति: शैलेंद्र श्रीमाल, पत्रकार










