राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कैंटीन में हड़कंप
भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) की मुख्य कैंटीन में छात्रों को परोसे गए भोजन में कथित तौर पर मरी हुई छिपकली मिलने के आरोप से हड़कंप मच गया। यह मामला केवल कैंटीन की साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता को लेकर ही नहीं, बल्कि छात्र अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है।
छात्र आरोप और वीडियो वायरल
छात्रों ने दावा किया कि डिनर के दौरान उन्हें परोसी गई सब्जी में मरी हुई छिपकली मिली। इस पर कैंटीन कर्मचारी ने इसे शिमला मिर्च का टुकड़ा बताकर मामले को तुच्छ बनाने की कोशिश की। छात्र इस घटना का वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
ABVP का विरोध
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने विश्वविद्यालय प्रशासन के पास जाकर कैंटीन की हालत और भोजन की गुणवत्ता को लेकर हंगामा किया। उनका कहना है कि पहले भी कैंटीन की साफ-सफाई और खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।
जांच समिति गठित
सोमवार को छात्रों ने कुलगुरु कार्यालय जाकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और यूआईटी डॉयरेक्टर सुधीर सिंह भदौरिया को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। छात्र परिषद का कहना है कि यह घटना होली के आसपास हुई थी और उसी समय छात्रों ने वीडियो बना लिया था, जो बाद में इंटरनेट पर वायरल हुआ।
डिनर में मिली छिपकली
छात्रों के अनुसार रात करीब 10 बजे कैंटीन में डिनर के दौरान उन्हें दाल, शिमला मिर्च की सब्जी, रोटी और चावल परोसे गए। सब्जी का स्वाद असामान्य लगा, तो एक छात्र ने ध्यान से देखा और उसमें मरी हुई छिपकली पाए जाने का संदेह किया।
छात्रों ने बनाई वीडियो रिपोर्ट
जैसे ही अन्य छात्र भी इस घटना को देखने पहुंचे, कैंटीन में अफरा-तफरी मच गई। छात्रों ने तुरंत कर्मचारियों को घटना की जानकारी दी, लेकिन कर्मचारियों ने इसे छिपकली नहीं बल्कि शिमला मिर्च का टुकड़ा बताकर इंकार कर दिया। इस दौरान छात्रों ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जिसे बाद में सोशल मीडिया पर साझा किया गया और वायरल होने के बाद विवाद और बढ़ गया।
कैंटीन कर्मचारियों का दावा
कैंटीन संचालक ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भोजन में कोई छिपकली नहीं थी। उन्होंने बताया कि जिस टुकड़े को छात्रों ने छिपकली बताया, वह शिमला मिर्च का हिस्सा था, जिसे कर्मचारी ने खुद खाकर भी दिखाया।
छात्र नेताओं की मांग
ABVP के शिवम जाट ने कहा कि यह परिसर की सबसे बड़ी कैंटीन है, जहाँ रोजाना करीब 500 छात्र भोजन करते हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
विश्वविद्यालय का कदम
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच समिति गठित की। समिति का उद्देश्य केवल तथ्य उजागर करना नहीं, बल्कि भविष्य में कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करना भी है।
सामाजिक और प्रशासनिक पहलू
यह मामला केवल खाद्य सुरक्षा का नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के अधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही और परिसर की स्वास्थ्य मानक पर भी सवाल उठाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, छात्र किसी भी संस्थागत समस्या को उजागर करने में संवैधानिक और कानूनी अधिकार रखते हैं।
निष्कर्ष
RGPV कैंटीन की यह घटना छात्रों और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है। यह दर्शाती है कि साफ-सफाई, खाद्य सुरक्षा और जिम्मेदार प्रशासन हर शैक्षणिक संस्थान में प्राथमिकता होनी चाहिए। छात्रों का सतर्क रहना और प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना दोनों ही इस तरह के विवादों को रोकने के लिए जरूरी हैं।










