उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते नौ वर्षों में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के बुनियादी ढांचे का विस्तार इतना व्यापक हुआ है कि राज्य के नागरिकों को इन सुविधाओं के लिए बाहर जाने की जरूरत अब काफी कम हो गई है।
इस अवधि में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाई गई, लाखों स्कूलों का नवीनीकरण हुआ और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों ने लाखों लोगों को लाभ पहुँचाया।
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र में वर्ष 2017 के बाद ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन मेडिकल कॉलेज’ के लक्ष्य के तहत हर जिले में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार हुआ। अब प्रदेश में 81 सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं।
- एमबीबीएस सीटें: 13,600
- पीजी सीटें: 6,866
इन कॉलेजों के माध्यम से प्रदेश के हर जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँच रही हैं। इससे नागरिकों को बेहतर इलाज के लिए अन्य राज्यों की ओर जाने की आवश्यकता नहीं है।
शिक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व विस्तार
शिक्षा क्षेत्र में ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ अभियान के तहत 1.32 लाख से अधिक स्कूलों का नवीनीकरण किया गया है।
- 1.30 करोड़ छात्रों को सीधे DBT के माध्यम से यूनिफॉर्म और बैग वितरित किए गए।
- डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हजारों स्कूलों में स्मार्ट क्लास और ICT लैब स्थापित की गई हैं।
इन प्रयासों ने प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।
रोजगार और कौशल विकास: युवाओं को नई उड़ान
उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) के तहत करीब 26 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है।
- ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना ने स्थानीय कारीगरों और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर खोले हैं।
- डिजिटल शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण से युवाओं की रोजगार क्षमता और आत्मनिर्भरता बढ़ी है।
सामाजिक सुरक्षा: गरीबों और वंचितों को मजबूत सहारा
योगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
- 67.50 लाख वृद्धजनों, 26.81 लाख निराश्रित महिलाओं और 11.57 लाख दिव्यांगजनों को पेंशन दी गई।
- पेंशन राशि को ₹300 से बढ़ाकर ₹1000 किया गया और अप्रैल 2026 से इसे ₹1500 प्रति माह कर दिया जाएगा।
- पिछले नौ वर्षों में 62 लाख गरीबों को पक्का आवास और 15 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया गया।
इन पहलों ने राज्य के गरीब और वंचित वर्ग की जिंदगी में स्थायी बदलाव लाया है।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका
महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गईं।
- मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना: 26.81 लाख बेटियों को लाभ
- प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना: 60 लाख माताओं को लाभ
- ग्रामीण आजीविका मिशन: 1.06 करोड़ महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं, जिनमें 18.55 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
इन पहलों से राज्य की आधी आबादी अब अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बन गई है।
डिजिटल गवर्नेंस: सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा
डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए।
- ई-साथी ऐप और 2066 ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी स्थापित की गई।
- इससे सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया।
इन पहलों ने नागरिकों की सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान और तेज बनाया है।
सुशासन की मिसाल: उत्तर प्रदेश का नया चेहरा
नौ वर्षों के सुशासन के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश अब एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में उभर रहा है।
- स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के बुनियादी ढांचे में सुधार
- सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के जरिए समाज के कमजोर वर्ग को सहारा
- डिजिटल गवर्नेंस के जरिए सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता
इन सभी पहलुओं ने नागरिकों के जीवन को आसान और बेहतर बनाया है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के क्षेत्र में हुए सुधार ऐतिहासिक हैं।
- हर जिले में चिकित्सा और शिक्षा के अवसर
- लाखों युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण
- सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण के जरिए गरीबों और वंचितों की जिंदगी बेहतर
अब राज्य के नागरिकों को स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के लिए अन्य राज्यों की ओर देखने की जरूरत नहीं है। ये पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के रूप में स्थापित कर रही हैं।










