*अभावों में पला सपना, समाज के लिए बना अब संकल्प: बलराम सोनी की प्रेरणादायक कहानी*

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*अभावों में पला सपना, समाज के लिए बना अब संकल्प: बलराम सोनी की प्रेरणादायक कहानी*
*इंदौर।* “संघर्ष ने मुझे सिखाया कि दर्द क्या होता है, और उसी दर्द ने मुझे दूसरों के लिए कुछ करने की राह दिखाई।” यह शब्द हैं इंदौर के समाजसेवी *बलराम सोनी* के, जिन्होंने अपने जीवन के कठिन अनुभवों को समाज सेवा की शक्ति में बदल दिया है।
### *संघर्षपूर्ण शुरुआत और पारिवारिक पृष्ठभूमि*
बलराम सोनी का जन्म एक मध्यमवर्गीय स्वर्णकार परिवार में हुआ। उनका परिवार पुश्तैनी रूप से चांदी के आभूषण, घुंघरू और बिछिया बनाने का कार्य करता था। जैसे-जैसे मशीनीकरण बढ़ा, हाथ से काम करने वाले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति डगमगा गई। एक समय ऐसा भी था जब स्कूल की फीस जुटाना तक मुश्किल हो गया था। इस आर्थिक संकट ने उन्हें बचपन में ही जिम्मेदारियों और संघर्ष का चेहरा दिखा दिया।
### *सेवा का सफर: 12 साल की उम्र से शुरुआत*
बलराम सोनी की सेवा यात्रा मात्र 12 साल की उम्र में शुरू हुई। 1991 में छत्रीबाग स्थित साईं मंदिर के पास एक बुजुर्ग हनुमान मंदिर के पुजारी की सेवा करने का उन्हें अवसर मिला। पुजारी जी के आशीर्वाद को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी पूंजी माना और उनके देवलोकगमन के बाद संकल्प लिया कि वे समाज के हर जरूरतमंद की सेवा करेंगे।
### *मीनाक्षी सेवा समिति: 150 कर्मठ लोगों की टीम*
शुरुआत में उन्होंने ‘राम-बलराम मित्र मंडली’ के माध्यम से कार्य शुरू किया, जो बाद में वर्ष 2017 में *मीनाक्षी सेवा समिति* के रूप में स्थापित हुई। आज इस समिति के साथ लगभग 150 लोग जुड़े हैं, जिनमें 50 सदस्यों की मुख्य टीम चौबीसों घंटे सेवा के लिए तत्पर रहती है। टीम का हर सदस्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कानूनी सलाह या आर्थिक सहायता जैसे क्षेत्रों में दक्ष है।
### *संस्था द्वारा किए जा रहे प्रमुख कार्य*
बलराम सोनी और उनकी टीम विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही है:
* *शिक्षा और स्वास्थ्य:* जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना और बीमारों का उचित इलाज कराना।
* *सामाजिक सहायता:* निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में सहयोग।
* *सहारा:* बुजुर्गों, दिव्यांगों, मानसिक रोगियों और अनाथ बच्चों की देखभाल।
* *पर्यावरण:* वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के लिए निरंतर कार्य।
बलराम सोनी का मानना है कि उन्हें हिम्मत और स्वाभिमान पिता से मिला, तो धर्म और करुणा की भावना मां से मिली। आज उनकी टीम इंदौर में सकारात्मक बदलाव की एक मिसाल बन चुकी है।
शैलेंद्र श्रीमाल “खुशी श्रीमाल”
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Author: KPN News

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