दान की शुचिता पर ‘मैनेजमेंट’ का पहरा? महासंघ के आयोजन पर उठे सवाल
इंदौर। भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में इंदौर के श्वेतांबर जैन महासंघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम अब भक्ति के बजाय विवादों के केंद्र में आ गया है। समाज के प्रबुद्धजनों और सुधि श्रावकों ने आयोजन की पारदर्शिता और प्रबंधन को लेकर महासंघ के समक्ष कई तीखे प्रश्न खड़े किए हैं, जिससे पूरे जैन समाज में हलचल मच गई है।
लाखों के दान का हिसाब अब तक सार्वजनिक नहीं विगत दिनों आयोजित इस महोत्सव के लिए समाज के लगभग 72 भामाशाहों ने ₹1,08,000 की सहयोग राशि प्रदान की थी। दानदाताओं का उद्देश्य धर्म प्रभावना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना था। किन्तु आयोजन संपन्न होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी महासंघ ने इस दान राशि के उपयोग का कोई विस्तृत लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया है। समाज के लोगों का कहना है कि पारदर्शिता का अभाव संस्था की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा रहा है।
भोजन की गुणवत्ता और आडम्बर पर नाराजगी धार्मिक आयोजनों में ‘साधर्मी वात्सल्य’ (भोजन व्यवस्था) का विशेष महत्व होता है, लेकिन यहाँ भी श्रद्धालुओं को निराशा हाथ लगी। कई सदस्यों ने शिकायत की है कि इतनी बड़ी राशि संग्रह होने के बावजूद भोजन की गुणवत्ता अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं थी। आरोप है कि वास्तविक धर्म प्रभावना के स्थान पर बाहरी चमक-धमक, सजावट और लोक दिखावे पर अधिक धन व्यय किया गया। प्रबुद्धजनों का मानना है कि यह दान राशि का दुरुपयोग और दानदाताओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है।
बाउंसर्स की तैनाती पर गहरा आक्रोश विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू आयोजन स्थल पर ‘गैर-जैन बाउंसर्स’ की तैनाती रही। समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने इसे अनुचित और जैन परंपराओं के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि अहिंसा और अपरिग्रह के संदेश देने वाले भगवान महावीर के उत्सव में बाउंसर्स की क्या आवश्यकता थी? यह कदम समाज की गरिमा और मूल्यों को ठेस पहुँचाने वाला है।
समाज की मांग: श्वेत पत्र जारी करे महासंघ समाज के वरिष्ठों ने महासंघ से पुरजोर मांग की है कि वह शीघ्र ही आय-व्यय का विवरण सार्वजनिक करे। दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि समाज का अटूट विश्वास होता है। अब देखना यह है कि महासंघ इन उठते सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और समाज के डिगते विश्वास को पुनः स्थापित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।








