विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया स्क्रीन टाइम और ऑटिज्म के बीच संबंध
नई दिल्ली – (रिपोर्टर)
खबर का सार
ऑटिज्म और स्क्रीन समय के बीच संबंध को लेकर इंटरनेट पर चर्चा तेज हो रही है। कई लोग मानते हैं कि अधिक स्क्रीन टाइम सीधे तौर पर ऑटिज्म का कारण बनता है, लेकिन डॉक्टरों ने इस धारणा को गलत ठहराया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि ऑटिज्म एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जो आनुवंशिक, पर्यावरणीय और जैविक कारणों से प्रभावित होती है, और इसे केवल स्क्रीन टाइम से जोड़ना अनुचित होगा।
घटना का विस्तार
ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) एक ऐसा संज्ञानात्मक और व्यवहारिक विकार है जो व्यक्ति के सामाजिक, संचार और व्यवहारिक विकास को प्रभावित करता है। हाल ही में सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर ऐसी सूचनाएं तेजी से फैल रही हैं जो स्क्रीन टाइम को ऑटिज्म का एक मुख्य कारण बताती हैं। लेकिन विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के कथन वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ऑटिज्म के कई पहलू हैं जिनमें जेनेटिक्स, प्रोलाइफरेशन ऑफ न्यूरोनल कनेक्शन्स, और जन्म के बाद के पर्यावरणीय प्रभाव शामिल हैं। स्क्रीन टाइम पर निर्भरता बढ़ना एक आधुनिक युग की चुनौती है, लेकिन इसका ऑटिज्म से सीधा सम्बन्ध सिद्ध नहीं हुआ है।
संबंधित बयान/प्रतिक्रिया
नेशनल ऑटिज्म सोसाइटी के डॉक्टर ऋषि वर्मा ने कहा, “ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसके विकास में कई कारक योगदान करते हैं। स्क्रीन टाइम को केवल एक जोखिम के रूप में देखना नकारात्मक और अधूरा दृष्टिकोण होगा। हमें माता-पिता और समाज को सही दिशा में जागरूक करना चाहिए कि वे विज्ञान आधारित समझ रखें।” इसके अतिरिक्त, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा गुप्ता ने भी कहा कि इससे जुड़ी सबसे बड़ी भूल यह है कि लोग टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग और कम उम्र में अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर को ऑटिज्म से जोड़ देते हैं। जबकि यह कम उम्र के बच्चों की देखभाल और विकास के लिए चिंताजनक जरूर हो सकता है, पर यह ऑटिज्म का प्राथमिक कारण नहीं है।
अतिरिक्त जानकारी या प्रभाव
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि माता-पिता और अभिभावक बच्चों के स्क्रीन टाइम को उचित सीमाओं में रखें और उनकी सामाजिक, शारीरिक और मानसिक विकास की गतिविधियों को प्रोत्साहित करें। इसके अलावा, किसी भी चिंता या संदेह की स्थिति में बच्चों को जल्द से जल्द विशेषज्ञ से जांच और परामर्श दिलाना आवश्यक है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार ऑटिज्म का निदान और इलाज जटिल होता है, और इसके लिए समग्र दृष्टिकोण की जरूरत होती है जिससे प्रभावित व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ समर्थन मिल सके। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्क्रीन टाइम की अधिकता को नियंत्रित करना ज़रूरी है, लेकिन साथ ही हमें ऑटिज्म के व्यापक पहलुओं को समझकर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।
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