ईरानी जहाज पर यूक्रेन के हमले से बढ़ा तनाव, होर्मुज में IRGC की सख्ती; अमेरिका-ईरान विवाद ने फिर पकड़ी रफ्तार

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नई दिल्ली, दिल्ली

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह तक चले सैन्य टकराव के बाद हालात सामान्य होने की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन कैस्पियन सागर में एक ईरानी वाणिज्यिक जहाज पर हुए हमले ने क्षेत्रीय तनाव को एक बार फिर बढ़ा दिया है। ईरान ने इस हमले के लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है और संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, कैस्पियन सागर में उसके एक व्यापारिक जहाज पर हमला किया गया, जिसमें चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हुआ। मंत्रालय ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताते हुए इसकी तीखी निंदा की है। तेहरान ने कहा कि यूक्रेन की यह कार्रवाई क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ाने वाली है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा यूक्रेन को जवाबदेह ठहराने की मांग की है।

दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि रूस, ईरान को सैटेलाइट इंटेलिजेंस उपलब्ध करा रहा है, जिसके आधार पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों के पास रूस और ईरान के सैन्य सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण हैं, जिन्हें सहयोगी देशों के साथ साझा किया जाएगा। जेलेंस्की के अनुसार जुलाई के मध्य में रूस ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैटेलाइट निगरानी तेज कर दी थी।

इसी बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कई जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन नहीं करने पर रोक दिया। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक कुछ जहाजों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां भी चलाई गईं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और उसके घोषित नौवहन नियमों का पालन कराने के लिए की गई। इससे पहले भी कई जहाजों को बिना अनुमति निर्धारित मार्ग से गुजरने पर रोका गया था।

ईरानी सैन्य अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका ने जून में हुए समझौते का उल्लंघन करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में वैकल्पिक समुद्री मार्ग तैयार करने का प्रयास किया। ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा अकरमिनिया के अनुसार, जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने ईरानी सैन्य निगरानी के दायरे में हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। उनका कहना है कि होर्मुज पर ईरान अपने अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की योजना स्थगित कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी रक्षा तंत्र में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की उपलब्धता कम होने और क्षेत्रीय सुरक्षा जोखिम बढ़ने की वजह से यह फैसला लिया गया। साथ ही ओमान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं भी बनी हुई हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिकी हितों या सहयोगी देशों पर कोई नया हमला होता है तो सभी विकल्प खुले रहेंगे।

इस बीच, कतर के परिवहन मंत्रालय ने घोषणा की है कि 26 जुलाई से समुद्री जहाजों और नौकाओं की आवाजाही फिर से सामान्य रूप से शुरू की जा सकती है। मंत्रालय ने सभी जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करने और सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इससे क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी जहाज पर हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती सैन्य गतिविधियां और रूस-यूक्रेन विवाद के नए आयाम पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना सकते हैं। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर ईरान, अमेरिका, यूक्रेन और खाड़ी क्षेत्र में हो रहे घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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Author: KPN News

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