एनटीए में जवाबदेही की कमी

The lack of accountability within the NTA

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एनटीए में जवाबदेही की कमी पर उठ रहे सवाल

नई दिल्ली – (रिपोर्टर)

खबर का सार

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की स्थापना 2017 में समाज के रूप में की गई थी, लेकिन इसे संसद के अधिनियम के जरिए नहीं बनाया गया। इस वजह से इस संस्थान पर उम्मीदवारों के प्रति किसी भी तरह की कानूनी जवाबदेही या जिम्मेदारी तय नहीं है, जिससे गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

घटना का विस्तार

2017 में गठित राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का उद्देश्य विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और तटस्थ तरीके से आयोजित करना था। हालांकि, चूंकि इसे संसद के अधिनियम के माध्यम से स्थापित नहीं किया गया बल्कि सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत पंजीकृत किया गया, इसलिए एनटीए पर वह स्थायी कानूनी दायित्व लागू नहीं होता जो अन्य सरकारी संस्थाओं पर होता है। नतीजन, परीक्षार्थियों को परीक्षा प्रक्रिया में आई किसी भी समस्या या अनुचित व्यवहार के खिलाफ ठोस कानूनी सहारा नहीं मिलता।

प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने इस बात पर चिंता जताई है कि एनटीए को एक वैधानिक संस्था के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए ताकि वह परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखे और परीक्षा में आने वाली गलतियों के लिए जवाबदेह हो सके। एक वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी का कहना है, “जब तक एनटीए के पास कानूनी जवाबदेही नहीं होगी, तब तक परीक्षार्थी पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगे। यह एजेंसी कैसे अपनी जिम्मेदारी निभाएगी, यह सवाल बना रहेगा।”

अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव

एनटीए की जवाबदेही ना होने का असर सिर्फ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शैक्षिक मानक और विश्वास पर असर डालता है। पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी से परीक्षाओं की विश्वसनीयता को भी जोखिम हो सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि संसद एक आवश्यक कानून के तहत एनटीए को स्थापित करे ताकि उसके दायित्व और कर्तव्य स्पष्ट रूप से परिभाषित हों और उम्मीदवारों को न्यायिक सुरक्षा मिल सके। इस दिशा में कदम उठाने से न केवल एजेंसी की जवाबदेही सुनिश्चित होगी, बल्कि शिक्षा प्रणाली की समग्र गुणवत्ता और विश्वास भी बढ़ेगा।

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Source

KPN News
Author: KPN News

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