दृश्यता और कहानी कहने के बीच: हुमैशा क़ुरैशी और कृतिका कामरा ने बॉलीवुड के भविष्य पर विचार व्यक्त किए

Between visibility and storytelling: Huma Qureshi and Kritika Kamra on Bollywood’s future

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बॉलीवुड में नई प्रतिभाओं को मिल रही कम अवसरों की चुनौती

मुंबई – (रिपोर्टर)

कहानी का सार: बॉलीवुड में नई प्रतिभाओं के लिए अवसर कम हुए

बॉलीवुड में उभरते कलाकारों को मौजूदा दौर में अपने करियर की शुरुआत करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। फिल्म निर्माण की संख्या घटने और बदलाव के इस दौर में, हुमैशा क़ुरैशी एवं कृतिका कामरा ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि नई कहानियां और मध्यम बजट की फ़िल्में अब बनना दुर्लभ हो चली हैं, जिससे नए कलाकारों के लिए मौके बेहद सीमित हो गए हैं।

घटना का विस्तार: फ़िल्म निर्माण में आधे से अधिक कमी

हुमैशा क़ुरैशी ने प्रगट किया कि हिंदी फ़िल्म निर्माण में पिछले कुछ वर्षों में लगभग आधे की कमी आई है, जिसका सीधा असर नए अभिनेता-अभिनेत्री के अवसरों पर पड़ा है। वे कहती हैं कि इसलिए नए कलाकारों के लिए भूमिकाएं सीमित हो रही हैं, क्योंकि बड़े बजट पर ही फिल्में बनना सुरक्षित मानी जा रही हैं। दूसरी ओर, कृतिका कामरा ने बताया कि बॉलीवुड अब केवल बड़े बजट की फ़िल्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है और ऐसा माहौल बन गया है जहां केवल संख्यात्मक सफलता को महत्व दिया जाता है। इसके चलते मध्यम बजट की फिल्में लगभग गायब हो गई हैं, जहां नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल सकता था।

प्रतिक्रिया: कलाकारों का अनुभव और विचार

हुमैशा क़ुरैशी ने कहा कि बॉलीवुड का भविष्य कहानी और दृश्यता के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर है। वे मानती हैं कि केवल बड़े सितारों और बड़े बजट की फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करने से उद्योग की विविधता प्रभावित होती है। कृतिका कामरा ने इस बात पर जोर दिया कि नए कलाकारों के सामने आने के लिए जरूरी है कि फिल्मों की संख्या बढ़े और नई कहानियों को मौका मिले। उन्होंने कहा, “हम ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां केवल संख्याएं मायने रखती हैं, हालाँकि सच्ची कला और कहानी कहने की जड़ें कमज़ोर नहीं होनी चाहिए।”

अतिरिक्त जानकारी: उद्योग में बदलाव और संभावनाएं

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने से बॉलीवुड में संभावनाएं बढ़ी हैं, लेकिन पारंपरिक बड़े पर्दे पर बदलाव अभी धीमा दिख रहा है। मध्यम बजट की फिचर फिल्में और नए कलाकारों के लिए सफल मंच बनने के लिए आवश्यक है कि निर्माता-निर्देशक नए विचारों और जोखिम लेने को तैयार हों। इसके साथ ही, दर्शकों का स्वाभाविक समर्थन नए प्रयोगों को बढ़ावा देगा। हुमैशा क़ुरैशी और कृतिका कामरा दोनों की राय में, केवल नाटकीय दृश्यता से अधिक जरूरी है वास्तविक और प्रेरक कहानी कहने की कला। यही बॉलीवुड का भविष्य तय करेगी।

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Author: KPN News

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