अमेरिकी न्याय विभाग ने 40 लोगों की नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई शुरू की है। इन लोगों पर गंभीर आरोप हैं, जिनमें भ्रष्टाचार और नाबालिगों का यौन शोषण शामिल है। अगर अदालत फैसला सुनाती है तो इनका निर्वासन प्रक्रिया शुरू हो सकती है। न्याय विभाग ने बताया कि इनमें भारत, पाकिस्तान, चीन समेत कई देशों के मूल निवासी शामिल हैं।
40 लोगों पर याचिका दायर
ये याचिकाएं ट्रंप प्रशासन के दौरान दायर की गईं, जिसमें पहली बार एक साथ 40 लोगों की नागरिकता रद्द करने का प्रयास किया जा रहा है। अमेरिकी न्याय विभाग अभी सबूत जुटाकर इन मामलों पर फैसला लेगा। यह कार्रवाई जिला अदालतों में की गई है।
इन 40 लोगों में 11 मेक्सिको, 4 पाकिस्तान, 4 चीन, 2 मिस्र, 2 फिलीपींस, 1 भारत, 1 ब्रिटेन, 1 कंबोडिया के नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा नाइजीरिया, कैमरून, कोलंबिया, पेरू और वेनेजुएला के भी कई नागरिकों की नागरिकता खतरे में है।
भारतीय मूल के बलविंदर पर आरोप
न्याय विभाग की याचिका में बलविंदर सिंह नाम के भारतीय मूल के व्यक्ति पर फर्जी पहचान का उपयोग कर अमेरिका में प्रवेश और नागरिकता हासिल करने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ सात आरोप हैं, जिनमें गलत बयान और गैरकानूनी कृत्य शामिल हैं।
बलविंदर ने 1992 में पहली बार आवेदन दिया था। 2003 में दूसरे नाम से स्थायी निवासी बने और 2009 में उसी दूसरे नाम से नागरिकता हासिल की। ये कार्रवाई उनके नैतिक चरित्र पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
पाकिस्तान मूल के अहमद वहाब खट्टक और अहमद खान के खिलाफ भी याचिकाएं दायर की गई हैं। इन सभी पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक न्याय विभाग ने कुल 384 विदेशी मूल के अमेरिकी नागरिकों की पहचान की है, जिनकी नागरिकता रद्द होने की संभावना है। ट्रंप प्रशासन ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए बड़े वकीलों की तैनाती की है।
यह कदम अमेरिकी कानून व्यवस्था की कड़ी निगरानी और सावधानी का हिस्सा है, जहां अवैध तरीकों से ली गई नागरिकता को चुनौती दी जा रही है। इससे पूरी प्रक्रिया में सख्ती बढ़ी है।
न्याय विभाग की इस कार्रवाई पर कानूनी और सामाजिक स्तर पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है, क्योंकि यह बड़ी संख्या में विभिन्न देशों के मूल के लोगों को प्रभावित कर रहा है।










