जिस देश में MBBS किया, वहां का मेडिकल लाइसेंस जरूरी: NMC ने विदेश डॉक्टरों के लिए नियम स्पष्ट किया

जिस देश में MBBS किया, वहां का मेडिकल लाइसेंस जरूरी: NMC ने विदेश डॉक्टरों के लिए नियम स्पष्ट किया

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नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने विदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण नियम स्पष्ट किया है। NMC ने कहा है कि भारत में फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) में शामिल होने के लिए आवश्यक है कि विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट के पास उस देश का मेडिकल प्रैक्टिस लाइसेंस हो जहां से उसने डिग्री प्राप्त की है। यह नियम भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में मेडिकल अभ्यास से जुड़ी प्रक्रिया को मानकीकृत करने के लिए लागू किया गया है।

FMGE नियम और नई शर्तें

FMGE भारत में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए आवश्यक परीक्षा है जो विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को पास करनी होती है। NMC ने बताया कि इस परीक्षा के लिए केवल वही स्टूडेंट्स उपस्थित हो सकते हैं जिन्होंने NEET क्वालिफाई किया हो और विदेश में कम से कम 54 महीने की मेडिकल पढ़ाई की हो। इसके अलावा, मेडिकल डिग्री अंग्रेजी माध्यम में होनी चाहिए और स्टूडेंट को संबंधित देश में अनिवार्य इंटर्नशिप और क्लिनिकल ट्रेनिंग पूरी करनी होगी।

सबसे अहम बात यह है कि स्टूडेंट के पास उस देश का मेडिकल प्रैक्टिस लाइसेंस होना जरूरी है, जहां से उसने डिग्री ली हो। अगर कोई छात्र सिर्फ ‘जूनियर डॉक्टर’ के रूप में काम करता है पर उसके पास पूरी तरह से स्वतंत्र प्रैक्टिस की अनुमति नहीं है तो वह FMGE के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।

भावना का सवाल और NMC का जवाब

जॉर्जिया में छह साल के MBBS कोर्स करने वाली भावना नाम की एक छात्रा ने PM ग्रीवेंस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसने पूछा था कि क्या ऐसे छात्र FMGE में बैठ सकते हैं या नहीं। NMC ने जवाब देते हुए कहा कि फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट को उस देश में रजिस्ट्रेशन या मेडिकल लाइसेंस लेना अनिवार्य है, जो स्थानीय मेडिकल ग्रेजुएट्स को मिलता है।

NMC ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘जूनियर डॉक्टर’ का दर्जा तभी मान्य होगा जब उसे स्वतंत्र रूप से मेडिकल प्रैक्टिस करने की कानूनी अनुमति हो। यदि जॉर्जिया में पोस्टग्रेजुएट सर्टिफिकेशन के बाद ही यह अनुमति मिलती है, तो सिर्फ जूनियर डॉक्टर बनने से यह शर्त पूरी नहीं होती। इस मामले का फैसला उस देश के नियमों के अनुसार होगा।

भावना ने PTI को बताया कि कई एजुकेशन कंसल्टेंट छात्र को गुमराह कर रहे हैं। वे बता रहे हैं कि जॉर्जिया में छह साल का MD कोर्स पूरा करने के बाद जूनियर डॉक्टर के रूप में काम करने से भारत में FMGE देने की योग्यता मिल जाती है, जो सही नहीं है।

भारतीय दूतावास, जो पहले जॉर्जिया का राजनयिक प्रतिनिधित्व करता था, ने सितंबर 2022 में एक एडवाइजरी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि जॉर्जिया में अंडरग्रेजुएट मेडिकल पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र जूनियर डॉक्टर बन सकते हैं, लेकिन स्वतंत्र प्रैक्टिस के लिए उन्हें नेशनल पोस्ट-डिप्लोमा क्वालिफिकेशन एग्जाम पास करना होगा, और पोस्टग्रेजुएट शिक्षण या रेसीडेंसी करनी होगी।

रेगुलेशन 4(b) लागू होने के बाद कई छात्रों और कंसल्टेंट्स के बीच भ्रम बढ़ गया है कि कौन से देश स्वतंत्र प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस देते हैं। लगभग 30,000 से 40,000 भारतीय छात्रों ने जॉर्जिया में मेडिकल कोर्स में दाखिला लिया है, जिन्हें इस नियम की पूरी जानकारी नहीं है। एक कंसल्टेंट ने सुझाव दिया कि NMC और भारतीय दूतावास को उचित एडवाइजरी जारी कर छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना चाहिए।

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KPN News
Author: KPN News

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