हर रोज मम्‍मी-पापा को लड़ते देख बेटे के मन में बैठा डर, बोला-700 बार सोचना जरूरी

हर रोज मम्‍मी-पापा को लड़ते देख बेटे के मन में बैठा डर, बोला-700 बार सोचना जरूरी

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किसी भी कपल के बीच असहमति या झगड़ा होना सामान्य बात है, लेकिन जब लंबे समय तक यह क्रम चलता रहे तो इसके प्रभाव बच्चों पर गंभीर हो सकते हैं। ऐसा ही एक अनुभव रील क्रिएटर युवराज दुआ ने साझा किया है, जिनके माता-पिता 27 सालों से लगातार झगड़ते आ रहे हैं। इसका असर उनके बेटे के मन पर इतना गहरा है कि अब वह शादी करने से पहले 700 बार सोचने की बात करता है।

दीर्घकालीन तनाव और बच्चों पर असर

युवराज बताते हैं कि इस लंबे संघर्ष में वे दिन-रात बिना रुके लड़ते रहते हैं। यहां तक कि जब वे सेरलेक पाउडर लेते थे और अब प्रोटीन पाउडर, तब भी उनकी विवाद की स्थिति बनी रहती है। यह देख युवराज के मन में शादी और रिश्तों को लेकर डर एवं असहजता पैदा हो गई है। वे कहते हैं कि इस तरह का माहौल देखकर उनकी शादी करने की इच्छा कम होती जा रही है।

वे और उनकी बहन अक्सर यही चर्चा करते हैं कि उनका जीवन चक्र केवल उनके माता-पिता की लड़ाइयों का निरीक्षण करना है। रोज सुबह उठकर उन लड़ाइयों के बीच कड़ी सोच-विचार करनी पड़ती है, जो समाधान न पाने वाली रहती हैं। इससे न सिर्फ बच्चे, बल्कि पूरा परिवार मानसिक रूप से प्रभावित होता है।

निराशा और भविष्य की सोच

समय के साथ युवराज के अंदर उम्मीद कम होती गई कि स्थिति सुधरेगी। वे कहते हैं कि यदि शादी के सात फेरे पूरी करने के बाद भी हर दिन इसी प्रकार लड़ाई देखने को मिले, तो सावधानी से सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए। उनका मानना है कि इन परिस्थिति में शादी करने से पहले कई बार विचार करना जरूरी होता है।

युवराज जैसे कई बच्चे ऐसे परिवारों में पले-बढ़े हैं, जहां पेरेंट्स की लड़ाइयां दैनिक जीवन का हिस्सा रहती हैं। इस तरह के माहौल में बच्चे अक्सर खुद को असहाय महसूस करते हैं और विवादों के बीच फंस जाते हैं। वे अनजाने में एक पक्ष लेते हैं या समाधान के लिए मजबूर होते हैं, जो उनकी मानसिक स्थिति के लिए नुकसानदायक है।

इस लगातार तनाव की वजह से बच्चों के मन में रिश्तों को लेकर नकारात्मक सोच विकसित होती है। कई बार वे माता-पिता के रिश्ते को देखकर ही जीवनसाथी चुनने या विवाह करने reluctant हो जाते हैं। यह स्थिति उनके सामाजिक और व्यक्तिगत विकास पर प्रभाव डालती है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, पेरेंट्स को चाहिए कि वे अपने झगड़ों को बच्चों से दूर रखें। उन्हें ऐसी परिस्थितियां बनानी चाहिए जहां बच्चे सुरक्षित और भावनात्मक रूप से सहज महसूस करें। इससे बच्चे मानसिक रूप से स्वस्थ रहेंगे और भविष्य में बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

पेरेंट्स के बीच स्वस्थ संवाद के बिना बच्चों का जीवन बाधित होता है और लंबे समय में यह समाज को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए परिवार के सदस्य अपने विवादों को समझदारी से सुलझाएं और बच्चों पर इसका बुरा प्रभाव न पड़े, इसका ध्यान रखें।

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KPN News
Author: KPN News

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