प्रयागराज में शिक्षा निदेशालय के बाहर चार दिनों तक चले TGT-PGT अभ्यर्थियों के अनिश्चितकालीन धरने को पुलिस ने गुरुवार देर शाम जबरन खत्म कर दिया। छात्रों ने पुरानी नियमावली के तहत भर्ती कराने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू किया था, लेकिन आंदोलन उग्र होने और कानपुर हाईवे जाम करने के बाद पुलिस ने कड़ा कदम उठाया। इस कार्रवाई में दर्जनों छात्रों को हिरासत में भी लिया गया है।
हाईवे जाम के बाद पुलिस की कड़ी कार्रवाई
शिक्षा निदेशालय के बाहर चार दिनों तक धरने पर बैठे छात्रों ने गुरुवार को कानपुर हाईवे को बंद कर दिया। इससे यातायात ठप्प हो गया और कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन और पुलिस ने छात्रों को कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांगों पर अड़े रहे। अंत में पुलिस ने बल प्रयोग कर छात्रों को हाईवे से हटाया और धरना खत्म कराया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस दौरान कुछ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है, जिनमें छात्र-छात्राएं शामिल हैं। इस बगैर अनुमति के आंदोलन को गंभीर अपराध माना गया है।
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें क्या हैं?
- पुरानी नियमावली का पालन: टीजीटी-पीजीटी भर्ती प्रक्रिया पुरानी नियमावली और पैटर्न के अनुसार चलाने की मांग।
- अंतिम मौका चाहिए: नए नियम लागू होने से प्रभावित अभ्यर्थियों को भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर (रिलैक्सेशन) दिया जाना चाहिए।
ये छात्र पिछले कई महीनों से समान मांगों को लेकर प्रदर्शनरत हैं। इससे पहले भी सितंबर में लगभग 19 दिनों तक उनका आंदोलन चला था, जिसे बातचीत के बाद स्थगित किया गया था।
हालांकि, तब भी उनके सवाल अभी तक अनसुलझे हैं, जिसके चलते वे दोबारा धरने पर बैठ गए थे। पुलिस के इस कड़े रवैये ने अभ्यर्थियों में निराशा और आक्रोश दोनों बढ़ा दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसे प्रदर्शन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, इसलिए आवश्यक कार्रवाई की गई। वहीं, छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी मांगों को अनदेखा कर रहा है।
यह विवाद शिक्षिकाओं की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की माँग को सामने लाता है। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और भविष्य में समाधान के लिए दोनों पक्षों के बीच वार्ता की संभावनाएँ बनी हैं।
इस मामले पर स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से कोई अंतिम टिप्पणी अभी तक नहीं आई है, लेकिन छात्रों का प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई यहां की सामाजिक और शैक्षिक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।









