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दिवाली विशेष: मोतीचूर के लड्डू — इस दिवाली, घर पर बनाना आसान!
दिवाली और मोतीचूर के लड्डू का साथ पुराना है — दानेदार, रसीले, मुँह में घुल जाने वाले ये लड्डू हर थाली की शान हैं। बाहर से खरीदे लड्डुओं में अक्सर ज़्यादा मिठास या पुराना घी होता है, लेकिन घर पर बने मोतीचूर के लड्डू ताज़े, शुद्ध और अपने हाथ के स्वाद वाले होते हैं। खबर पर नजर की खानपान विशेष शृंखला में आज हम आपको घर पर परफेक्ट, दानेदार मोतीचूर के लड्डू बनाना सिखा रहे हैं — बारीक बूंदी, सही चाशनी और सही बाँधने की तरकीब के साथ।
सामग्री (लगभग 20–25 लड्डू)
• बारीक बेसन — 1 कप
• चीनी — डेढ़ कप (चाशनी के लिए)
• पानी — चाशनी के लिए, ज़रूरत अनुसार
• इलायची पाउडर — आधा छोटा चम्मच
• केसर — कुछ धागे, थोड़े गरम दूध में भिगोए हुए
• कटे पिस्ते और बादाम — 2 बड़े चम्मच (सजाने के लिए)
• घी — थोड़ा सा (हाथ में लगाने के लिए)
• तेल — बूंदी तलने के लिए
• छेद वाली कलछी (झारा) — बारीक बूंदी के लिए
विधि (Step-by-Step)
1. बूंदी तलना: बेसन में थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर पतला, गाँठ रहित घोल बनाएँ — घोल न ज़्यादा गाढ़ा हो, न ज़्यादा पतला। कड़ाही में तेल मध्यम गरम करें, छेद वाली कलछी को तेल के ऊपर रखें और घोल डालकर बारीक बूंदी छानें। बूंदी हल्की सुनहरी होते ही निकाल लें — ज़्यादा कुरकुरी न करें, वरना लड्डू सख्त बनेंगे।
2. चाशनी बनाना: एक बर्तन में डेढ़ कप चीनी और लगभग 1 कप पानी डालकर उबालें। डेढ़ तार की चाशनी बनाएँ — उँगलियों के बीच चाशनी खींचने पर डेढ़ तार बने, यही सही पहचान है। इसमें इलायची पाउडर और केसर वाला दूध मिलाएँ।
3. बूंदी मिलाना: गरम चाशनी में गरम बूंदी डालकर अच्छी तरह मिलाएँ। बर्तन को ढककर 10–15 मिनट रखें, ताकि बूंदी चाशनी को अच्छी तरह सोख ले और मिश्रण लड्डू बाँधने लायक हो जाए।
4. लड्डू बाँधना: हाथ में थोड़ा घी लगाएँ। मिश्रण हल्का गरम रहते ही उससे गोल-गोल लड्डू बाँधें — न ज़्यादा कसकर दबाएँ, न ढीले छोड़ें। ऊपर से कटे पिस्ते-बादाम छिड़कें।
5. परोसना और रखना: लड्डुओं को पूरी तरह ठंडा होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में रखें। ये 1–2 हफ्ते तक ताज़े रहते हैं। दिवाली की थाली में, पूजा के प्रसाद में या मेहमानों को डिब्बा भरकर दीजिए — सबको पसंद आएँगे।
टिप्स
• बूंदी बारीक हो तो ही असली मोतीचूर का दाना आता है — कलछी के छेद बारीक रखें।
• चाशनी डेढ़ तार की ही रखें — एक तार की चाशनी से लड्डू बिखरेंगे, दो तार की से सख्त बनेंगे।
• बूंदी को ज़्यादा तलकर कुरकुरा न करें — नरम बूंदी ही चाशनी सोखकर रसीली बनती है।
• लड्डू गरम मिश्रण से ही बाँधें — ठंडा होने पर मिश्रण जम जाता है और लड्डू नहीं बँधते।
इस दिवाली, घर पर बनाना आसान! आप भी ये मोतीचूर के लड्डू बनाइए और अपने अनुभव हमें ज़रूर बताइए। खबर पर नजर की खानपान विशेष शृंखला में कल — 6 नवंबर को — धनतेरस विशेष काजू कतली की रेसिपी।
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