कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर इस साल 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को देश भर में धनतेरस पर्व मनाया जाएगा। यह खास त्योहार भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी के पूजन के साथ संपन्न होता है। धनतेरस की शाम यमराज के नाम से चौमुखी दीपक जलाने की प्राचीन परंपरा भी चलती आ रही है। इसे घर के मुख्य द्वार पर जलाना परिवार की सुरक्षा और आरोग्य के लिए आवश्यक माना जाता है।
धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पूजा का मुहूर्त शाम 6:02 बजे से 7:57 बजे तक रहेगा, जिसमें पूजा की कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट की होगी। प्रदोष काल शाम 5:32 बजे शुरू होकर 8:09 बजे तक रहेगा। वहीं, वृषभ काल भी लगभग इसी समय के अंदर आएगा। ये समय विशेष रूप से पूजा और दीपक जलाने के लिए शुभ माना जाता है। इस दौरान पूजा कर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
यम दीपक जलाने की परंपरा का धार्मिक महत्व अपार है। माना जाता है कि धनतेरस की शाम जब यमराज के नाम चौमुखी दीपक जलाया जाता है, तो अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। दीपक में चार बत्तियां होती हैं, जिन्हें जलाकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर प्रज्ज्वलित किया जाता है। ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार के सदस्यों पर संकट कम पड़ता है। यह दीपक एक तरह से सुरक्षा कवच का काम करता है।
दीपक जलाने का सही तरीका और नियम
यम दीपक जलाने के लिए सबसे उचित समय धनतेरस की शाम का प्रदोष काल होता है। दीपक को सुरक्षित तरीके से मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखकर जलाना चाहिए। इसके लिए बड़ा पुराना दीया लेकर उसमें सरसों का तेल डालकर चार बत्तियां लगानी चाहिए। जब घर के सभी सदस्य अपने काम निपटा लें और शाम का समय हो, तब इस दीपक को जलाना शुभ माना जाता है। जलाने के बाद यह ध्यान रखें कि दीपक को उल्टा करके न देखें।
दीपक जलाते समय यमराज देव का स्मरण करना आवश्यक है और परिवार की लंबी आयु, सुरक्षा की प्रार्थना की जानी चाहिए। दीपक को मुख्य द्वार के पास साफ-सुथरे स्थान पर ही रखें जहां कोई बाधा या पैर न पड़े। दीपक जब पूरी तरह से बुझ जाए तो अगली सुबह उसे आदरपूर्वक हटा दें। इन नियमों का पालन होने पर यह अनुष्ठान सफल होता है और घर में शांति और खुशहाली बनी रहती है।
यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जो परिवार के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। लोग इसे बेहद श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाते हैं। यम दीपक जलाना परिवार के स्वास्थ्य और सुरक्षा का माध्यम माना जाता है। इसके बिना धनतेरस पर्व अधूरा रहता है।
ध्यान देने योग्य बाते:
- यम दीपक जलाने समय प्रदोष काल का होना आवश्यक है।
- दीपक दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जलाना उत्तम होता है।
- दीपक जलाने के बाद उसे उल्टा देखने से बचें।
- पूजा के बाद सुबह दीपक को सावधानी से हटाएं।
धनतेरस के दिन लोग पीतल, तांबा या चांदी के बर्तन खरीदने की भी खास इच्छा रखते हैं, क्योंकि मान्यता है कि इससे धन की वृद्धि होती है। इस प्रकार के कई रीति-रिवाज धनतेरस को खास बनाते हैं।
“धनतेरस की शाम चौमुखी दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और परिवार की रक्षा होती है।”
मुख्य तथ्य:
- धनतेरस 6 नवंबर, 2026 को मनाया जाएगा।
- चौमुखी दीपक प्रदोष काल (6:02 से 7:57 बजे) जलाना शुभ होता है।
- दीपक दक्षिण दिशा में मुख करके जलाना चाहिए।
- दीपक जलाने से परिवार को संकट से रक्षा मिलती है।








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