इंदौर/ब्यूरो (KPN): देशभर में साइबर ठगों ने मासूम और लालची लोगों को शिकार बनाने के लिए एक बड़ा जाल बिछाया है। दैनिक भास्कर की एक बड़ी पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर, इंदौर और भोपाल सहित बिहार और कोलकाता में बैठे ठग ‘बैंक खातों’ की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम को खपाने के लिए किया जा रहा है।
कैसे काम करता है यह ‘साइबर ठगी’ का नेटवर्क?
जांच में सामने आया है कि ठगों के एजेंट गरीब और बेरोजगार लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते हैं। इन खातों की पूरी किट (पासबुक, चेकबुक, एटीएम और सिम कार्ड) ठगों को बेच दी जाती है।
* खातों की दरें: एक सामान्य बैंक खाता ₹5,000 से लेकर ₹35,000 तक में खरीदा जा रहा है।
* प्रीमियम खाते: यदि किसी खाते की ट्रांजेक्शन लिमिट ज्यादा है (जैसे ₹3.50 लाख तक), तो उसकी कीमत लाखों में लगाई जा रही है।
* एजेंटों का कमीशन: इस खेल में सक्रिय एजेंटों को प्रति खाता 10% तक का मोटा कमीशन मिलता है।
ग्वालियर से बिहार और कोलकाता तक जुड़ा है नेटवर्क
पड़ताल के दौरान ठगों और एजेंटों के बीच हुई बातचीत के चौंकाने वाले अंश सामने आए हैं:
* ग्वालियर: यहाँ आधार कार्ड के जरिए खाते खुलवाकर उन्हें बिहार और अन्य राज्यों में सक्रिय ठगों को भेजा जा रहा है।
* बिहार (अररिया): यहाँ के ठग ₹3.50 लाख की लिमिट वाले खातों की मांग कर रहे हैं ताकि ठगी का पैसा सुरक्षित तरीके से निकाला जा सके।
* कोलकाता: यहाँ एटीएम और सिम कार्ड की ‘मैत्री’ के नाम पर ₹35,000 तक में खाते खरीदे जा रहे हैं।
ठगों का ‘रेट कार्ड’ और कमाई का झांसा
ठगों ने बाकायदा एक ‘रेट कार्ड’ तैयार कर रखा है। युवाओं को ‘मल्टीलेवल मार्केटिंग’ और ‘बिजनेस’ के नाम पर फंसाया जाता है और उन्हें महीने में 4-5 लाख रुपये कमाने का लालच दिया जाता है। साइबर विशेषज्ञों की सलाह: अपना बैंक खाता, एटीएम या ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। आपके नाम पर खुला खाता यदि किसी अवैध गतिविधि में पाया जाता है, तो कानूनन आप भी उतने ही दोषी माने जाएंगे।
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प्रस्तुति: शैलेन्द्र श्रीमाल, पत्रकार खबर पर नजर परिवार वेबसाइट: www.KPNindia.in
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