पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में घोषणा की है कि अगले पांच दिनों तक ईरान के किसी भी ऊर्जा ढांचे या पावर प्लांट पर हमला नहीं किया जाएगा।

ट्रंप का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है, जिसके आधार पर उन्होंने रक्षा विभाग को ईरान के पावर प्लांट्स और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसी भी सैन्य कार्रवाई को पांच दिनों के लिए स्थगित करने का निर्देश दिया है।

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क्या है भारत का प्लान?

भारत सरकार ने इस घोषणा पर सतर्क नजर बनाए रखने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि हम घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अभी ट्रंप की घोषणा के अमल पर इंतजार करना होगा। लेकिन युद्ध विराम की स्थिति बनती है तो भारत की प्राथमिकता अब होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में फंसे 22 भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकालने की है।

एलपीजी आपूर्ति समस्या

जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन जहाजों में पेट्रोनेट, भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), गेल और रिलायंस जैसी प्रमुख कंपनियों के टैंकर शामिल हैं।

इनमें एक एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) जहाज पेट्रोनेट एलएनजी का है, जबकि सात एलपीजी (तरलीकृत पेट्रोलियम गैस) से लदे जहाज हैं, जो भारत की मौजूदा एलपीजी आपूर्ति समस्या को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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ये एलपीजी टैंकर मुख्य रूप से भारत पेट्रोलियम और हिंदुसतान पेट्रोलियम के हैं। इसके अलावा कच्चे तेल से लदे जहाज इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, रिलायंस और अन्य कंपनियों के हैं।

संचालकों के साथ संपर्क में सरकार

अधिकारी ने कहा कि इन जहाजों को निकालना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से सर्वोच्च प्राथमिकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से भारत के अधिकांश ऊर्जा आयात होते हैं।

सरकार इन जहाजों के नाविकों और संचालकों के साथ लगातार संपर्क में है। पश्चिम एशिया संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में रुकावट के कारण भारत में एलपीजी की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है।

एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव

देश अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसमें से 90 प्रतिशत से अधिक होर्मुज के रास्ते आती है। हाल के हफ्तों में आयात में भारी कमी आई है, जिससे घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।