चेन्नई, तमिलनाडु | 27 अप्रैल 2024
मुरुगन, जिन्हें कर्तिगेय या स्कंद के नाम से भी जाना जाता है, दक्षिण भारत में एक प्रमुख और अत्यंत पूजनीय देवता हैं। उनके बारे में माना जाता है कि वे भक्तों को आध्यात्मिक मुक्ति और मोक्ष प्रदान करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मुरुगन का संबंध वीरता, ज्ञान और उत्साह से जुड़ा हुआ है, जो भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
भक्तों का मानना है कि मुरुगन की कृपा से व्यक्ति न केवल सांसारिक बंधनों से मुक्त होता है, बल्कि जीवन के हर संकट से पार पा लेता है। तमिलनाडु में उनका विशेष रूप से उच्च सम्मान है, जहां कई प्रसिद्ध मुरुगन मंदिर हैं, जैसे तिरुपरंकुंड्रम, पालानी और स्वामि मुरुगन मंदिर। इनके दर्शन व आराधना से भक्तों को मानसिक शांति एवं आध्यात्मिक प्रगति का अनुभव होता है।
ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुरुगन की विजय शक्ति ने दुष्टों का संहार कर धर्म की स्थापना की। उनकी आस्था से जुड़ी परंपराएं और त्यौहार जैसे वित्सु, उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। इस प्रकार, मुरुगन को मोक्षदाता के रूप में पूजा जाना उनका एक प्रमुख धार्मिक आयाम है।
धार्मिक विशेषज्ञ बताते हैं कि मुरुगन की पूजा करने से मनुष्य के अंदर सकारात्मक परिवर्तन आता है और वह जीवन की कठिनाइयों को धैर्य के साथ पार कर सकता है। कई भक्त अपनी आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति के लिए मुरुगन के मंदिरों का नियमित रूप से भ्रमण करते हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि मुरुगन केवल एक देवता नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उन्नति का मार्गदर्शक भी हैं।
निष्कर्षतः, मुरुगन की भक्ति और उनकी कृपा से भक्त अपना जीवन एक नई दिशा की ओर मोड़ सकते हैं। वे सांसारिक जीवन के द्वंद्वों से मुक्त होकर आत्मा की शांति प्राप्त करते हैं, जो वास्तविक मोक्ष की परिभाषा है। अतः मुरुगन की पूजा और आस्था भारतीय संस्कृति एवं धर्म का एक महत्वपूर्ण अंग बनी हुई है।
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संवाददाता: खुशी श्रीमाल
मार्गदर्शक: शैलेंद्र श्रीमाल (जिला अध्यक्ष – जैन पत्रकार परिषद, इंदौर)
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