कोलकाता के विरासत प्रकाश परियोजना का भारत में विस्तार, अमृतसर के खालसा कॉलेज से शुरू
कोलकाता/अमृतसर – (रिपोर्टर) भारत के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को नई पहचान देने वाली ‘हेरिटेज इल्यूमिनेशन प्रोजेक्ट’ अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल रही है। कोलकाता के प्रमुख स्थलों को एक नई, शानदार रात की रोशनी में सजाने के बाद, इस परियोजना को अमृतसर के खालसा कॉलेज के विशाल परिसर में भी लागू किया जा रहा है।
परियोजना का सारांश
हेरिटेज इल्यूमिनेशन प्रोजेक्ट का उद्देश्य ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को आधुनिक और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से सजाना है। कोलकाता में इस परियोजना ने सफलता के कई महत्वपूर्ण पड़ाव पार किए हैं, जहां शहर के अनेक प्रतिष्ठित भवन और स्मारक रात के समय रोशनी से जगमगाने लगे हैं। इसी सफलता को देखते हुए परियोजना के संस्थापक मुधर पाथेर्या ने इसे पूरे देश में फैलाने का निर्णय लिया है। पहला चरण अमृतसर के खालसा कॉलेज में शुरू किया गया है, जो अपनी स्थापत्य कला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।
परियोजना का विस्तार और क्रियान्वयन
अमृतसर के खालसा कॉलेज के परिसर में इस परियोजना का क्रियान्वयन कई महीनों की योजना और तैयारी के बाद शुरू हुआ है। कॉलेज के कई प्रमुख भवनों को आधुनिक एलईडी और ऊर्जा-कुशल रोशनी से सजाया जा रहा है, जिससे इतिहास और वास्तुकला का समुंदर रात में भी जीवंत दिखे। इस पहल को लेकर कॉलेज प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की ओर से भी उत्साह जताया गया है। प्रकाश व्यवस्था न केवल परिसर की सुंदरता बढ़ा रही है, बल्कि छात्रों और आगंतुकों के लिए भी एक आकर्षक अनुभव प्रदान कर रही है।
संबंधित बयान और प्रतिक्रियाएं
मुधर पाथेर्या ने इस अवसर पर कहा, “यह परियोजना सिर्फ इमारतों को सजाने की पहल नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और विरासत को नई रोशनी में प्रस्तुत करने का प्रयास है। कोलकाता में मिली सफलता के बाद हम चाहते हैं कि देश के अन्य शहर भी इस पहल से लाभान्वित हों।” खालसा कॉलेज के प्रधानाध्यापक ने भी इस पहल की सराहना करते हुए बताया कि यह परियोजना परिसर के सौंदर्य के साथ-साथ छात्रों के मनोबल को भी ऊंचा करेगी। स्थानीय लोग भी इस नए बदलाव से काफी खुश दिखे हैं।
अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव
हेरिटेज इल्यूमिनेशन प्रोजेक्ट से जुड़ी प्रकाश तकनीक ऊर्जा बचाने वाली है और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी। इस वजह से यह परियोजना न केवल सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थायी विकास के लक्ष्य के अनुरूप भी है। आगे चलकर इस योजना को देश के अधिक ऐतिहासिक स्थलों में लागू करने की योजना बनाई जा रही है, जिससे भारत की समृद्ध विरासत को एक नई पहचान मिलेगी और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। इस पहल से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।
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