डॉक्टर्स ने NEET-सुपर स्पेशलिटी काउंसलिंग में देरी ख़त्म करने की मांग की
नई दिल्ली – (रिपोर्टर)
खबर का सार
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रेंस टेस्ट (NEET) सुपर स्पेशलिटी काउंसलिंग में गंभीर देरी को लेकर डॉक्टर्स ने केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। जनवरी 2026 में परिणाम घोषित होने के बाद भी काउंसलिंग प्रक्रिया 10 अप्रैल, 2026 से शुरू नहीं हो पायी है, जिससे लाखों मेडिकल छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस (FAIMA) ने इस स्थिति को “पूर्ण शिथिलता” करार दिया है।
घटना का विस्तार
FAIMA के अनुसार, जनवरी में घोषित परिणामों के अनुसार ही अप्रैल 10 को काउंसलिंग शुरू होनी थी, लेकिन अब तक संबंधित विश्वविद्यालयों या काउंसलिंग बोर्ड ने कोई आधिकारिक तिथि या प्रक्रिया शुरू नहीं की है। मेडिकल शिक्षा से जुड़ी इस अहम प्रक्रिया में इस विलंब के कारण सुपर स्पेशलिटी कोर्सेज में दाखिले की समयसीमा प्रभावित हो रही है। इससे डॉक्टरों के करियर में देरी के साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञता की कमी की आशंका भी बढ़ रही है। विभिन्न राज्यों के मेडिकल कॉलेजों और प्रशिक्षण संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया रुकी हुई है, जिसके चलते अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी महसूस की जा रही है।
प्रतिक्रिया
FAIMA के महासचिव डॉ. संजय शर्मा ने कहा, “हम इस देरी को गंभीर समस्या मानते हैं। मेडिकल युवा पीढ़ी के लिए इससे बड़ा नुकसान और कोई नहीं हो सकता। सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू कर पूरी पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करें। इससे डॉक्टरों को उनके भविष्य की योजना बनाने में मदद मिलेगी।” उन्होंने कहा कि विगत वर्षों में भी इस तरह की देरी देखी गई है, जिससे डॉक्टरों और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं।
अतिरिक्त जानकारी और प्रभाव
NEET सुपर स्पेशलिटी काउंसलिंग में देरी से उन मेडिकल छात्रों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जो फार्मेसी, सर्जरी, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसे विशेष क्षेत्रों में प्रशिक्षण के इच्छुक हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में भी बाधा उत्पन्न हो सकती है। विशेषज्ञ शिक्षकों और जूनियर डॉक्टरों के प्रशिक्षण में अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। विशेषज्ञता हासिल करने वाले डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को अत्याधुनिक इलाज उपलब्ध कराना भी मुश्किल हो जाएगा। डॉक्टरों एवं चिकित्सा संस्थानों के संगठन लगातार सरकार से इस स्थिति को सामान्य करने की मांग कर रहे हैं ताकि मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता बनी रहे।
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