150 झील पुनरुद्धार परियोजनाओं के पीछे का शख्स हैदराबाद के जलाशयों को बदलना चाहता है

The man behind 150 lake restoration projects wants to transform Hyderabad’s water bodies

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हैदराबाद और बेंगलुरु में बढ़ते शहरीकरण के बीच जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी: आनंद मल्लीगावड़ की अपील

हैदराबाद – (रिपोर्टर)

खबर का सार

तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के चलते हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे महानगरों के जल स्रोतों पर गंभीर संकट बनता जा रहा है। इस चुनौती के मद्देनजर भारत के प्रसिद्ध संरक्षणवादी आनंद मल्लीगावड़, जिन्हें ‘लेक मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है, ने पुनः नालों और झीलों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। उनका मानना है कि इन जल स्रोतों का पुनरुद्धार शहरीकरण के साथ-साथ स्थायी विकास के लिए अनिवार्य है।

घटना का विस्तार

आनंद मल्लीगावड़ ने पिछले कुछ दशकों में 150 से अधिक झील पुनरुद्धार परियोजनाओं का सफल संचालन किया है। वर्तमान में वह हैदराबाद के विभिन्न जलाशयों की स्थिति का निरीक्षण कर रहे हैं और स्थानीय प्रशासन से संयोजित प्रयास करने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जहां जलीय पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहेगा, वहीं लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध होगा और बाहरी पर्यावरणीय प्रभाव भी नियंत्रित होंगे। शहरी विकास की प्रक्रिया में अधिकांश जल निकाय अनदेखे और प्रदूषित हो रहे हैं, जो अगले समय में भारी जल संकट की ओर ले जाएगा।

संबंधित बयान/प्रतिक्रिया

आनंद मल्लीगावड़ ने अपने एक साक्षात्कार में कहा, “जल स्रोतों का संरक्षण एक साझा जिम्मेदारी है। केवल झीलों की सफाई ही जरूरी नहीं, बल्कि नालों की स्वच्छता और संवर्धन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इस कार्य में सरकार, स्थानीय निवासी और उद्योग सभी को मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करना होगा। तभी हम भविष्य के लिए सुरक्षित जल संसाधन सुनिश्चित कर पाएंगे।” स्थानीय प्रशासन ने इस दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण माना है और आने वाले महीने में संबंधित एजेंसियों के साथ एक व्यापक योजना बनाने का ऐलान किया है।

अतिरिक्त जानकारी या प्रभाव

शहरीकरण के साथ पानी के प्राकृतिक स्रोतों का संरक्षण मानव जीवन के लिए आवश्यक हो गया है। आनंद मल्लीगावड़ की कोशिशें न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ा रही हैं। उनकी परियोजनाएं अन्य शहरों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो रही हैं। एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर समय रहते इस विषय पर गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो शहरों के पानी की समस्या अवश्य बढ़ेगी, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक विकास दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसीलिए आनंद मल्लीगावड़ जैसे संरक्षणवादी नेताओं की भूमिका भविष्य में और भी अहम हो जाएगी।

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KPN News
Author: KPN News

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