भारत में मॉर्फिन के उपयोग का इतिहास और वर्तमान स्थिति
नई दिल्ली – (रिपोर्टर)
खबर का सार
मॉर्फिन को दुनिया में सबसे प्रभावशाली ओपिएट एनाल्जेसिक माना जाता है, जिसका उपयोग दर्द निवारण के लिए किया जाता है। भारत में भी यह दवा लंबे समय से उपयोग में है और लाखों मरीजों को राहत पहुंचाई है। मौजूदा समय में भी मौखिक मॉर्फिन कोडीन जैसे अन्य एनाल्जेसिक की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित माना जाता है। इससे न केवल दर्द में कमी आती है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही तरीके से प्रयोग होने पर मॉर्फिन में व्यसन की संभावना बहुत कम होती है।
घटना का विस्तार
भारत में मॉर्फिन का परिचय और उसके इस्तेमाल का इतिहास 19वीं सदी के अंत से शुरू होता है, जब यह दवा अंग्रेजी औपनिवेशिक काल में चिकित्सा क्षेत्रों में लाई गई। शुरुआत में केवल गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के लिए मॉर्फिन का इस्तेमाल किया गया, जैसे कैंसर रोगियों और गंभीर चोटिलों के लिए। समय के साथ सरकार ने इसके नियंत्रण और वितरण के नियम कड़े कर दिए। बावजूद इसके, कई वर्षों तक भारत में मॉर्फिन की उपलब्धता सीमित रही, खासकर ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों में। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों ने मॉर्फिन की आपूर्ति में सुधार के लिए विशेष कदम उठाए हैं ताकि प्रत्येक जरूरतमंद मरीज तक यह दवा पहुंच सके।
संबंधित बयान/प्रतिक्रिया
डॉ. अर्पिता शर्मा, एक प्रसिद्ध पेन स्पेशलिस्ट का कहना है, “मॉर्फिन क्रांतिकारी दवा है, जिसने गंभीर दर्द से जूझ रहे मरीजों के जीवन में सुधार लाया है। यह सच है कि मॉर्फिन के प्रति एक मिथक मौजूद है कि इससे नशा होता है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान और क्लीनिकल अनुभव यह साबित करते हैं कि जब मॉर्फिन को चिकित्सकीय देखरेख में और सही मात्रा में दिया जाता है, तो यह सुरक्षा और प्रभावशीलता दोनों प्रदान करता है।” इसके अलावा उन्होंने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिशनर्स की जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है ताकि वे मॉर्फिन का सही तरीके से उपयोग कर सकें।
अतिरिक्त जानकारी व प्रभाव
भारत सरकार द्वारा 2014 में लागू नई नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस एक्ट (NDPS) नियमावली के बाद मॉर्फिन की पहुंच में सुधार हुआ है। अब कई सरकारी अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में मॉर्फिन की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज मिल पाता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय पेन कंट्रोल कार्यक्रम के तहत मॉर्फिन के सुरक्षित उपयोग और वितरण पर प्रशिक्षण भी बढ़ाया जा रहा है। यह कदम न केवल मरीजों के जीवन को बेहतर करता है, बल्कि दवा के दुरुपयोग को भी सीमित करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मॉर्फिन के सही उपयोग से भारत में दर्द निवारण संबंधी स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव संभव है।
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