बीजिंग, चीन
रूस से तेल और गैस की खरीद को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित प्रतिबंध नीति पर चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। चीन ने गुरुवार को अमेरिकी ‘लांग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ को खारिज करते हुए कहा कि दूसरे देशों के साथ उसके सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
रूसी ऊर्जा खरीद पर टैरिफ का विरोध
चीन ने रूस से तेल और गैस खरीदने के मामले में संभावित अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों का विरोध किया है। बीजिंग का कहना है कि दूसरे देशों के साथ सामान्य व्यापारिक गतिविधियों में बाहरी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘लांग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ से आशय ऐसी स्थिति से है, जिसमें कोई देश अपने घरेलू कानूनों या प्रतिबंधों को अपने क्षेत्र से बाहर दूसरे देशों की कंपनियों या व्यापारिक गतिविधियों पर लागू करने की कोशिश करता है। चीन ने इसी तरह के अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के दावे पर आपत्ति जताई है।
अमेरिकी संसद में पारित हुआ प्रतिबंध बिल
अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ पारित किया है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस पर नए प्रतिबंध लगाने और रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार दिए जाने की बात कही गई है।
रूस के साथ व्यापार करने वाले प्रमुख देशों में चीन और भारत शामिल हैं। इसलिए प्रस्तावित कानून का संभावित प्रभाव इन देशों के व्यापारिक हितों पर भी पड़ सकता है।
चीन बोला- व्यापार में तीसरे पक्ष की दखलंदाजी नहीं
चीनी पक्ष ने कहा कि अन्य देशों के साथ उसके सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग में किसी तीसरे पक्ष को हस्तक्षेप या दबाव नहीं डालना चाहिए। बीजिंग का रुख है कि देशों के बीच व्यापारिक संबंध आपसी सहमति और आर्थिक हितों के आधार पर संचालित होने चाहिए।
चीन और रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण व्यापारिक संबंध हैं। रूसी तेल और गैस चीन की ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अहम हैं। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों का विस्तार दोनों देशों के बीच व्यापार को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
बढ़ सकता है अमेरिका-चीन तनाव
अमेरिका पहले से रूस पर विभिन्न प्रतिबंधों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। अब रूस के व्यापारिक साझेदारों पर संभावित टैरिफ की नीति सामने आने के बाद चीन ने इसका विरोध किया है।
चीन के ताजा बयान से स्पष्ट है कि वह रूस के साथ अपने सामान्य व्यापारिक संबंधों को लेकर किसी तीसरे देश के दबाव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है। इससे अमेरिका और चीन के बीच व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर तनाव बढ़ने की संभावना बनी हुई है।









