अहमदाबाद, गुजरात
गुजरात में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने संगठन को मजबूत करने और आंतरिक मतभेदों को दूर करने की कवायद तेज कर दी है। दोनों प्रमुख दल चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संगठन के भीतर सामने आ रहे विवादों को सुलझाने पर भी ध्यान दे रहे हैं।
बीजेपी ने आंतरिक विवाद के बीच भरूच और नर्मदा जिलों के जिलाध्यक्षों को बदल दिया है। वहीं कांग्रेस में पार्टी की एकमात्र लोकसभा सांसद गेनीबेन ठाकोर की नाराजगी के संकेत सामने आए हैं। हालांकि, गेनीबेन ने बैठक में शामिल नहीं होने की वजह दिल्ली में जरूरी काम बताया है।
BJP ने भरूच और नर्मदा में बदले जिलाध्यक्ष
गुजरात विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी संगठन में बदलाव कर रही है। पार्टी ने भरूच और नर्मदा जिलों के जिलाध्यक्षों को उनके पदों से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि दोनों जिलों में पार्टी के भीतर चल रहे विवादों के बीच यह कदम उठाया गया।
बीजेपी के लिए गुजरात महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्य है और पार्टी लंबे समय से यहां सत्ता में है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के स्तर पर किसी भी तरह के मतभेद को दूर करना पार्टी की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर संगठन पूरी तरह सक्रिय और एकजुट रहे। जिलाध्यक्षों में बदलाव को इसी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
कांग्रेस में गेनीबेन ठाकोर की नाराजगी के संकेत
दूसरी ओर, कांग्रेस में बनासकांठा से सांसद गेनीबेन ठाकोर को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हुई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने हाल ही में सांसद के निर्देश पर गठित जिले की कार्यकारिणी को भंग कर दिया था।
इसके बाद गेनीबेन ठाकोर के कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की ओर से गांधीनगर महानगर पालिका चुनाव को लेकर आयोजित बैठक में शामिल नहीं होने को नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा गया।
हालांकि, गेनीबेन ठाकोर ने बैठक में शामिल नहीं होने की वजह अलग बताई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में जरूरी काम होने के कारण वह बैठक में नहीं पहुंच सकीं। इसलिए बैठक से उनकी गैरमौजूदगी को सीधे तौर पर पार्टी से नाराजगी के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
दीपावली से पहले संगठन को मजबूत करने की कोशिश
गुजरात विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों ने संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं। बीजेपी जहां जिलास्तर पर सामने आ रहे विवादों को दूर करने के लिए बदलाव कर रही है, वहीं कांग्रेस भी संगठन और आगामी स्थानीय चुनावों को लेकर रणनीति तैयार कर रही है।
गांधीनगर महानगर पालिका चुनाव समेत आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए कांग्रेस के लिए संगठन में तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा। दूसरी ओर, बीजेपी की कोशिश स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय मजबूत करने की है।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संगठन को एकजुट रखने और स्थानीय स्तर के मतभेदों को समय रहते सुलझाने की होगी। आने वाले दिनों में दोनों पार्टियों में और संगठनात्मक बदलाव तथा राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।









