नई दिल्ली, दिल्ली
नकली और मिलावटी दवाओं के निर्माण तथा बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण निर्देश दिया। अदालत ने याचिका को सीधे लंबित रखने के बजाय उसकी प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजने का आदेश दिया है, ताकि वे इसमें उठाए गए मुद्दों पर विचार कर सकें।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय से पूछा कि क्या उन्होंने अदालत का रुख करने से पहले संबंधित सरकारी अधिकारियों को इस विषय में कोई सुझाव या प्रतिवेदन दिया था।
याचिकाकर्ता ने मौजूदा व्यवस्था में कथित खामियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बेंगलुरु के कई अस्पतालों में नकली कैंसर रोधी दवाओं की आपूर्ति किए जाने से संबंधित खबरों का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि नकली दवाओं के निर्माण और बिक्री पर प्रभावी रोक के लिए मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।
याचिका में नकली एवं मिलावटी दवाओं के निर्माण और बिक्री को रोकने के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी मजबूत करने और नकली दवाओं की बिक्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था बनाने की मांग रखी है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि याचिका को अदालत में लंबित रखने की तुलना में इसे प्रतिवेदन के तौर पर संबंधित अधिकारियों को भेजना अधिक प्रभावी रहेगा। इसके बाद रजिस्ट्री को याचिका की प्रति संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
पीठ ने इस तथ्य पर भी गौर किया कि याचिकाकर्ता ने याचिका दायर करने से पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क नहीं किया था। अदालत के निर्देश के बाद अब संबंधित अधिकारी याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करेंगे।
नकली दवाओं का मामला सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा है। ऐसे में याचिका में व्यापक नीति और निगरानी व्यवस्था की मांग महत्वपूर्ण मानी जा रही है।










