नई दिल्ली: तकनीकी प्रगति के चलते AI का उपयोग अनेक क्षेत्रों में हो रहा है, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी सामने आ रहे हैं। देशभर में एआई का इस्तेमाल कर अपराधी ठगी, ब्लैकमेलिंग और पहचान की धोखाधड़ी कर रहे हैं। हाल ही में आवाज की क्लोनिंग और फर्जी CCTV वीडियो के माध्यम से कई गंभीर मामले उजागर हुए हैं।
आवाज क्लोनिंग से करोड़ों की ठगी
जून में दिल्ली पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनपर AI आधारित वॉइस क्लोनिंग तकनीक का उपयोग कर मुंबई की एक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर की आवाज की नक़ल कर 10 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी करने का आरोप है। आरोपियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर फंड ट्रांसफर के आदेश दिए, जो कुल 63 बैंक खातों में बंटा था। यह मामला तब सामने आया, जब बैंक में एक आरोपी 9 लाख रुपये का चेक भुनाने पहुंचा।
आधिकारिक जांच में पता चला कि आवाज की नकल ने ठगी को और विश्वसनीय बना दिया। यह तकनीक पारंपरिक फोन ठगी से काफी ज्यादा खतरनाक साबित हुई है।
फर्जी वीडियो और डीपफेक से बढ़ रही चुनौतियां
दिल्ली पुलिस ने हाल ही में एक 24 वर्षीय युवक नसीम अहमद अमीन को गिरफ्तार किया, जिसने एआई से तैयार किया गया एक वीडियो बनाया था जिसमें ACP विवेक भगत को गलत व्यवहार करते दिखाया गया था। वीडियो को सोशल मीडिया पर असली CCTV फुटेज बताकर वायरल किया गया। पुलिस इस पूरे मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
अहमदाबाद में अप्रैल में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया जिन्होंने आधार वेरिफिकेशन को चकमा देने के लिए एआई जनित डीपफेक वीडियो का उपयोग किया। आरोप है कि उन्होंने कारोबारी के नाम पर नकली लोन के लेनदेन में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन में धोखा दिया।
गाजियाबाद पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जिनमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया का एक छात्र भी शामिल है। आरोप है कि उन्होंने AI से अश्लील वीडियो बनाकर एक NRI को ब्लैकमेल किया। आरोपियों ने 50 हजार डॉलर की मांग की, लेकिन पीड़ित ने पुलिस की मदद ली।
मध्य प्रदेश के इंदौर में फरवरी में एक परिवार को Ddeepfake वीडियो दिखाकर 1 लाख रुपये की ठगी हुई। नाबालिग बेटे का फर्जी वीडियो कॉल दिखाकर परिवार ने डर के कारण रकम ट्रांसफर की। पुलिस ने इसे डीपफेक तकनीक से पहली जबरन वसूली माना।
साइबर अपराध में AI का बढ़ता उपयोग नए प्रकार की चुनौतियां खड़ी कर रहा है। सरकार भी इस खतरे को समझ रही है और सुधारात्मक कदम उठा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डीपफेक तकनीक की पहचान की है और IT अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पुलिस और साइबर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं, लेकिन अपराधी लगातार नए AI उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। आम जनता से भी सतर्क रहने, किसी भी संदिग्ध कॉल या वीडियो पर भरोसा न करने और उचित स्रोत से जानकारी लेने की अपील की जा रही है। AI टेक्नोलॉजी के दुरुपयोग को रोकने के लिए व्यापक जागरूकता और तकनीकी नियम बनाना आवश्यक है।










