बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन 8 अक्टूबर को पुणे के फार्महाउस पर हुआ। 75 वर्ष के नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत और फैंस शोक में डूब गए। उनके अंतिम संस्कार में परिवार के अलावा फिल्मी सितारों और आम जनता ने भारी संख्या में भाग लिया।
अंतिम संस्कार में जुटी भीड़
नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के लिए उनके पुणे फार्महाउस पर बड़ी भीड़ उमड़ी। कई फिल्म और राजनीति जगत के लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए मौजूद थे। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता को मुखाग्नि दी, जबकि उनकी पत्नी भावुक होकर रोती नजर आईं। पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ विदा किया गया।
नाना पाटेकर ने जल्दबाजी में न होने की इच्छा जताई थी कि उन्हें सूखी लकड़ियों से जलाया जाए ताकि हादसे के समय आस-पास बैठे लोग आंसुओं से प्रभावित न हों। उन्होंने यह बात तीन साल पहले एक इंटरव्यू में स्पष्ट कर दी थी।
डॉक्टरी विवरण और अस्पताल की जानकारी
गोवा के मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी प्रमुख डॉ. शेखर सालकर ने बताया कि नाना पाटेकर को अस्पताल आने से पहले ही मृत अवस्था में पाया गया था। टीम ने उनके घर पहुंच कर तत्काल सीपीआर शुरू किया, लेकिन वे जीवित नहीं रहे। सीपीआर के दौरान ही उन्हें अस्पताल लाया गया था।
मृत्युपरांत मामला मेडिको-लीगल बन गया था और पुलिस को सूचित किया गया। शव का पोस्टमॉर्टम सरकारी मेडिकल कॉलेज में किया गया। इसके बाद ही शव को परिवार को सौंपा गया।
नाना पाटेकर ने छोटे-छोटे रोल से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। उन्होंने मुरुड-जंजीरा में मराठी परिवार में जन्म लिया था। पाटेकर को उनके दमदार अभिनय और खास डायलॉग delivery के लिए जाना जाता था। उनके फिल्मी कैरियर में ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’ जैसी हिट फिल्में शामिल हैं।
उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में अपना नाम बनाया और कई पुरस्कार प्राप्त किए। पाटेकर को तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और महाराष्ट्र राज्य फिल्म पुरस्कार मिले। इसके अलावा उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिला था।
नाना पाटेकर के परिवार में उनकी पत्नी और बेटा मल्हार हैं। उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों को भारी नुकसान हुआ है। उनके अभिनय की यादें सदा जीवित रहेंगी।










