नई दिल्ली, भारत।
किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादकता में सुधार लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिला स्तर पर निगरानी मजबूत करने की पहल की है। इस योजना के अंतर्गत देश के 100 पिछड़े जिलों में कृषि कार्ययोजनाओं की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए कलेक्टर हर महीने जिले में चल रही कृषि योजनाओं की समीक्षा करेंगे।
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है, जहां खेती से जुड़ी समस्याओं के कारण कृषि विकास की गति धीमी है। नियमित समीक्षा के माध्यम से योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।
100 जिलों में कृषि विकास पर विशेष ध्यान
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत ऐसे जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां कृषि उत्पादकता कम है, फसल सघनता अपेक्षाकृत कमजोर है और किसानों को संस्थागत ऋण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन क्षेत्रों में कृषि संबंधी समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए जिला स्तर पर कार्ययोजनाओं की प्रगति की निगरानी की जाएगी।
हर महीने होगी कार्ययोजना की समीक्षा
योजना के तहत कलेक्टर प्रत्येक महीने जिले की कृषि कार्ययोजना की समीक्षा करेंगे। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि निर्धारित योजनाओं पर कितना काम हुआ है और उनके क्रियान्वयन में कहां सुधार की जरूरत है। नियमित निगरानी से कृषि योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों तक लाभ पहुंचाने पर जोर
केंद्र सरकार की इस पहल में कृषि विकास से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को दूर करने पर ध्यान दिया जाएगा। कम उत्पादकता वाले जिलों में खेती की स्थिति सुधारना और किसानों को संस्थागत ऋण की उपलब्धता बढ़ाना योजना के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।
जिला स्तर पर नियमित समीक्षा से योजनाओं की प्रगति पर नजर रखने और स्थानीय समस्याओं की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। इससे कृषि क्षेत्र में सुधार के प्रयासों को गति देने और किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में काम किया जाएगा।










