जयपुर, राजस्थान। राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जहां आठवीं पास व्यक्ति पर फर्जी एमबीबीएस डिग्री के सहारे डॉक्टर बनने और 100 बेड का अस्पताल चलाने का आरोप लगा है। राजस्थान एसओजी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मामले में सात नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में सीकर निवासी पंकज यादव और जालौर जिले के नानजीराम चौधरी शामिल हैं। जांच में पता चला कि नानजीराम ने केवल आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बावजूद उस पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर चिकित्सक के रूप में पंजीकरण कराने का आरोप है।
जांच के मुताबिक, नानजीराम वर्ष 2010 से 2014 के बीच जालौर के एक निजी अस्पताल में मरीजों की पर्चियां बनाने का काम करता था। इस दौरान उसने नर्सिंग से जुड़े काम भी किए। इसके बाद कथित तौर पर उसने फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के जरिए चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता अपनाया।
आरोप है कि उसने आंध्र प्रदेश शिक्षा बोर्ड के नाम से दसवीं और बारहवीं के फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करवाए। इसके बाद कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी के नाम से एमबीबीएस की फर्जी डिग्री और मुंबई के एक कॉलेज से स्त्री रोग में डिप्लोमा हासिल करने का दावा किया गया।
एसओजी की जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि फर्जी डिग्री के आधार पर पंजीकरण कराने के बाद वह 100 बेड का अस्पताल चलाने लगा और मरीजों के ऑपरेशन भी करता था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए और पंजीकरण प्रक्रिया में किन लोगों ने मदद की।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपितों की तलाश कर रही है। साथ ही, पूरे मामले में अन्य लोगों की भूमिका और कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क की जांच जारी है।










