उत्तर प्रदेश के एटा जिले के थाना नयागांव परिसर में शनिवार देर रात एक दरोगा ने फांसी लगाकर आत्महत्या का प्रयास किया। समय रहते साथी पुलिसकर्मियों ने उसे फंदे से उतारा और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अलीगंज ले जाया गया। वहां उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी हालत में सुधार बताया, हालांकि उसे अभी भी डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है।
दरोगा की हालत और शुरुआती जानकारी
सीएचसी के चिकित्साधिकारी डॉ. शक्ति सिंह ने बताया कि दरोगा अतर सिंह को शनिवार आधी रात करीब 2:30 बजे भर्ती कराया गया था। वह बेहोशी की हालत में था। गले पर फांसी के निशान पाए गए हैं, जो उसकी हालत के कारण हुए थे। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी स्थिति अभी स्थिर है और सुधार की ओर है।
पुलिस ने बताया कि दरोगा ने आत्महत्या का यह प्रयास पारिवारिक झगड़े के कारण किया था। हालांकि, उसके साथ काम करने वाले पुलिसकर्मियों का मानना है कि वह ड्यूटी के मानसिक दबाव के कारण भी तनाव में था। यही वजह हो सकती है कि उसने यह कदम उठाया।
पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एसएसपी एटा डॉ. इलामारन जी ने कहा कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि दरोगा के परिवार में कुछ विवाद चल रहा था और उसने शराब के नशे में यह कदम उठाया। उन्होंने बताया कि पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक वजह सामने आएगी।
पुलिस कप्तान ने भी मामले की गहन जांच के आदेश जारी किए हैं। जांच के बाद ही घटना की पूरी सच्चाई सामने आएगी। इस बीच, दरोगा की हालत पर चिकित्सकों की नजर बनी हुई है।
इस घटना से पुलिस महकमे में खलबली मच गई है और सभी अधिकारी इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने भी बताया कि मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है ताकि ऐसे घटनाओं को रोका जा सके।
एटा में इस प्रकार की घटना एक चिंता का विषय बन गई है। पुलिस कर्मचारियों के कार्य दबाव और पारिवारिक विवाद के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक बताया जा रहा है। एक्सपर्ट्स भी पुलिसकर्मियों के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस प्रशासन ने कहा है कि पूरा सच सामने आने के बाद आवश्यक कार्रवाई होगी। फिलहाल, दरोगा अतर सिंह की हालत में सुधार को देखकर उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द रिकवर करेगा।
पुलिस और चिकित्सा संस्थान दोनों मिलकर इस घटना को लेकर गंभीर हैं। साथ ही, यह घटना मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य और पुलिस विभागों में सामंजस्य बनाए रखने की जरूरत पर भी ध्यान आकर्षित करती है।









