मानसून सत्र में आज पेश होंगे चार विधेयक, परिसीमन पर द्रमुक के 22 सांसद निर्णायक; शाह संभालेंगे मोर्चा

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नई दिल्ली, दिल्ली

संसद के मानसून सत्र के आखिरी चार दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम माने जा रहे हैं। परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र की राजग सरकार ने एक बार फिर संख्या बल जुटाने की कवायद तेज कर दी है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में द्रमुक के 22 लोकसभा सांसदों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल द्रमुक ने इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट रूप से किसी खेमे के पक्ष में नहीं रखा है।

परिसीमन विधेयक को सदन में पारित कराने के लिए राजग को करीब 350 से 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत मानी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुई टूट के बाद लोकसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के मौजूदा संख्या बल का समीकरण बदल गया है। ऐसे में द्रमुक के सांसदों का समर्थन विधेयक के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

द्रमुक के 22 सांसदों पर नजर

द्रमुक के 22 लोकसभा सदस्य इस समय दोनों राजनीतिक खेमों के बीच महत्वपूर्ण स्थिति में हैं। परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर द्रमुक का रुख विधेयक की आगे की राह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

राजग की कोशिश है कि विधेयक को सदन में पर्याप्त समर्थन के साथ पारित कराया जाए। इसके लिए सहयोगी दलों के अलावा उन दलों और सांसदों से भी समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है, जिनका रुख अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

विपक्ष के सामने एकजुटता की चुनौती

दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए के सामने भी अपनी एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट के बाद विपक्ष के मौजूदा संख्या बल पर इसका असर पड़ा है।

इसके साथ ही शरद पवार की एनसीपी-एसपी का आइएनडीआइए के साथ बने रहना भी विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिसीमन के मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच रणनीतिक तालमेल आने वाले दिनों में निर्णायक हो सकता है।

शाह संभालेंगे मोर्चा

परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मोर्चा संभालने की चर्चा है। सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त संख्या बल जुटाने की होगी। वहीं विपक्ष विधेयक को लेकर अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश करेगा।

मानसून सत्र के अंतिम चार दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसी दौरान सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देंगे। फिलहाल राजनीतिक नजरें द्रमुक के 22 सांसदों पर टिकी हैं। उनका रुख यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि परिसीमन विधेयक सदन में आगे बढ़ पाता है या नहीं।

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Author: KPN News

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