नई दिल्ली, दिल्ली
देश में रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) ने लगभग ₹7,000 करोड़ के अनुमानित निवेश से करीब 1,800 किलोमीटर लंबी नई LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
नई परियोजनाओं का उद्देश्य देश में LPG की आपूर्ति को अधिक मजबूत, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाना है। साथ ही, गैस की ढुलाई के लिए सड़क परिवहन पर निर्भरता को कम करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
PNGRB ने तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण LPG पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को सरकारी क्षेत्र की कंपनी GAIL (इंडिया) लिमिटेड विकसित करेगी।
इन नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद PNGRB-अधिकृत कॉमन-कैरियर LPG पाइपलाइन नेटवर्क में बड़ा विस्तार होगा। वर्तमान में यह नेटवर्क करीब 7,700 किलोमीटर लंबा है, जो बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर तक पहुंच जाएगा। यानी नेटवर्क में करीब 23.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
भारत अपनी LPG जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है। बड़ी मात्रा में LPG समुद्री मार्ग से देश के तटीय आयात टर्मिनलों तक पहुंचती है। इसके बाद गैस को देश के विभिन्न राज्यों और प्रमुख खपत केंद्रों तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग परिवहन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता है।
वर्तमान व्यवस्था में LPG की ढुलाई के लिए सड़क मार्ग की बड़ी भूमिका है। टैंकर और ट्रक बड़ी मात्रा में गैस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाते हैं। पाइपलाइन नेटवर्क बढ़ने से सड़क मार्ग पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
नई पाइपलाइन परियोजनाओं से सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की उम्मीद है। इससे LPG को प्रमुख क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी और आपूर्ति में आने वाली संभावित बाधाओं का प्रभाव भी कम किया जा सकेगा।
ऊर्जा क्षेत्र के लिहाज से यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है। देश में बढ़ती ऊर्जा जरूरतों और LPG की मांग को देखते हुए मजबूत परिवहन और वितरण नेटवर्क आवश्यक है। लगभग 1,800 किलोमीटर के इस नए पाइपलाइन विस्तार से आने वाले समय में LPG सप्लाई व्यवस्था को बेहतर आधार मिलने की उम्मीद है।










