नई दिल्ली, दिल्ली
भारत में अगस्त के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक तेजी देखी गई है। अचानक बढ़ी कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि चीनी उद्योग का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है और बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है।
कीमतों में तेजी के बीच यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि दुनिया में सबसे अधिक चीनी उत्पादन करने वाले देशों में भारत किस स्थान पर है और पड़ोसी पाकिस्तान की स्थिति क्या है।
भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादकों में
भारत वैश्विक स्तर पर चीनी उत्पादन करने वाले सबसे प्रमुख देशों में शामिल है। ब्राजील और भारत को दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में गिना जाता है। इनके अलावा थाईलैंड, चीन और अन्य देश भी महत्वपूर्ण मात्रा में चीनी का उत्पादन करते हैं।
भारत की विशाल गन्ना खेती और बड़ी संख्या में संचालित चीनी मिलें इसकी उत्पादन क्षमता को मजबूत बनाती हैं। देश के उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों में गन्ना उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
पाकिस्तान भी चीनी उत्पादन करने वाला देश है, लेकिन उत्पादन के मामले में वह भारत से काफी पीछे है। भारत की उत्पादन क्षमता और घरेलू बाजार पाकिस्तान की तुलना में कहीं अधिक बड़े हैं।
2024-25 में उत्पादन से ज्यादा रही खपत
वर्ष 2024-25 में भारत में चीनी की घरेलू खपत करीब 281 लाख मीट्रिक टन दर्ज की गई। इसके मुकाबले देश का कुल उत्पादन लगभग 261 लाख मीट्रिक टन रहा। यानी एक साल में घरेलू खपत उत्पादन से करीब 20 लाख मीट्रिक टन अधिक रही।
हालांकि उद्योग का कहना है कि इस अंतर के बावजूद देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। चीनी की उपलब्धता केवल एक वर्ष के उत्पादन पर निर्भर नहीं करती, बल्कि पिछले स्टॉक और कुल आपूर्ति व्यवस्था भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पहले लगातार अधिक रहा था उत्पादन
वर्ष 2018-19 से लेकर 2023-24 तक भारत में चीनी का उत्पादन हर साल घरेलू खपत से अधिक रहा था। वर्ष 2024-25 में उत्पादन में कमी आने और खपत बढ़ने के कारण तस्वीर बदली।
उत्पादन और खपत के इस अंतर का असर बाजार की कीमतों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उद्योग ने फिलहाल देश में चीनी संकट की किसी संभावना को खारिज किया है।
इथेनॉल उत्पादन भी बढ़ा रहा मांग का दबाव
गन्ने से बनने वाला इथेनॉल अब भारत की ऊर्जा नीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा मिलने से गन्ना आधारित इथेनॉल उत्पादन बढ़ा है। इसका मतलब है कि गन्ने के उपयोग का एक हिस्सा अब चीनी के अलावा इथेनॉल उत्पादन में भी जा रहा है।
ऐसे में उद्योग के सामने घरेलू चीनी खपत, उत्पादन और इथेनॉल की जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती है। फिलहाल उद्योग का कहना है कि देश में चीनी पर्याप्त है, लेकिन अगस्त में कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की तेजी ने बाजार की स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है।









