नई दिल्ली, दिल्ली। हर मौसम में चलने वाले और रोजमर्रा की जरूरत से जुड़े कारोबार की तलाश कर रहे लोगों के लिए गेहूं का आटा बनाने का व्यवसाय एक विकल्प हो सकता है। आटा भारतीय घरों की नियमित जरूरतों में शामिल है, इसलिए इसकी मांग सालभर बनी रहती है। छोटे स्तर पर मशीनरी, कच्चे माल और कार्यस्थल की व्यवस्था के साथ इस कारोबार को करीब ₹2.5 लाख के अनुमानित निवेश से शुरू किया जा सकता है।
गांव और छोटे शहरों में इस कारोबार की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं, क्योंकि वहां गेहूं आसानी से उपलब्ध हो सकता है। स्थानीय किसानों, थोक बाजारों और मंडियों से गेहूं खरीदकर उसकी पिसाई की जा सकती है। तैयार आटे को स्थानीय दुकानों, घरों और अन्य ग्राहकों तक पहुंचाकर बिक्री की जा सकती है।
आटा बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले गेहूं की सफाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर उसे धोकर अच्छी तरह सुखाया जाता है। इसके बाद गेहूं को मशीन में डालकर पिसाई की जाती है और तैयार आटे को अलग-अलग वजन के पैकेट में पैक किया जाता है। बाजार में बिक्री के लिए साफ-सुथरी पैकेजिंग और उत्पाद की गुणवत्ता महत्वपूर्ण होती है।
मशीनरी और अन्य सामानों में पल्वराइजर मशीन, डबल स्टेज पल्वराइजर, रोस्टर, गैस कनेक्शन, वजन करने का उपकरण, सीलिंग मशीन और बर्तन शामिल हो सकते हैं। इन पर कुल करीब ₹1.25 लाख का अनुमानित खर्च माना गया है।
इसके अलावा कारोबार को नियमित रूप से चलाने के लिए वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता होगी। कच्चे माल पर करीब ₹50,000, कर्मचारियों के वेतन पर ₹39,000, बिजली पर ₹9,000 और गैस पर लगभग ₹2,000 खर्च का अनुमान लगाया गया है। इस प्रकार वर्किंग कैपिटल करीब ₹1 लाख हो सकती है। कार्यस्थल या भवन की व्यवस्था पर ₹25,000 खर्च जोड़ने पर कुल शुरुआती निवेश करीब ₹2.5 लाख पहुंच सकता है।
अनुमानित मासिक बिक्री ₹1.15 लाख और खर्च ₹1.05 लाख होने पर करीब ₹10,000 का शुद्ध लाभ संभव है। हालांकि वास्तविक कमाई बाजार की स्थिति और बिक्री पर निर्भर करेगी।









